9 Sep 2017

दो सालों में कैसे सुधरे दिल्ली के सरकारी स्कूल, हार्वर्ड करेगा रिसर्च

दिल्ली के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था का डंका अब विदेशों में भी बजने लगा है हार्वर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ़ एजुकेशन ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में रिसर्च करने के लिये दिल्ली सरकार से इजाज़त मांगी

दिल्ली : दिल्ली के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था का डंका अब विदेशों में भी बजने लगा है. हार्वर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ़ एजुकेशन ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में रिसर्च करने के लिये दिल्ली सरकार से इजाज़त मांगी है.
बता दें दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों के लिए स्कूल मैनेजमेंट कमिटी (एसएमसी) बनाई थी. जिसका काम स्कूलों को सुधार कर बेहतर नतीजे तक पहुंचाना था. जिसके काफी बेहतर नतीजे आए और अब स्कूल मैनेजमेंट कमिटी पर हार्वर्ड स्कूल रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है. 

हार्वर्ड ग्रैजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन ने दिल्ली सरकार से एसएमसी पर रिसर्च करने की इजाजत मांगी थी. सरकार ने रिसर्च प्रोजेक्ट को शर्तों के साथ मंजूरी दी है. सरकार के शिक्षा विभाग ने हार्वर्ड स्कूल को रिसर्च की मंजूरी देते हुए साफ कर दिया है कि स्टूडेंट्स, पैरंट्स का पता, फोन नंबर रिसर्च टीम को नहीं दिया जाएगा. 

स्कूलों में होने वाली पैरंट्स-टीचर्स मीटिंग (पीटीएम) के दिन रिसर्च टीम पैरंट्स की मंजूरी लेकर उनसे बात कर सकेगी. जानकारी के मुताबिक हार्वर्ड ग्रैजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन के असिस्टेंट प्रफेसर एमिरिक डेविस ने भारत यात्रा के दौरान शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया से मुलाकात की थी. 

इसके बाद शिक्षा मंत्री ने विभाग के अधिकारियों के साथ इस मसले पर बातचीत की और अब विभाग ने इस बारे में हार्वर्ड स्कूल को लेटर भेज दिया है. शिक्षा मंत्री की सलाहकार आतिशी मार्लेना ने बताया कि दो साल पहले एसएमसी बनाई गई और कमिटी ने स्कूलों में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है. 

उन्होने कहा एसएमसी के सदस्यों को स्कूलों में फैसलों के साथ जोड़ा गया और इसके काफी अच्छे नतीजे सामने आए. उन्होंने कहा कि अब एसएमसी के नए सिरे से चुनाव होंगे. दो साल के लिए एसएमसी बनाई गई थी अब फिर चुनाव होंगे. 

रिसर्च टीम दो साल के प्रोजेक्ट पर काम करेगी और देखेगी कि पिछले दो साल में एसएमसी ने क्या-क्या काम किए? एसएमसी में 16 मेंबर्स होते हैं, जिनमें से 12 पैरंट्स होते हैं. एक प्रिंसिपल, एक टीचर, एक विधायक का प्रतिनिधि और एक सोशल वर्कर होता है.

शिक्षा विभाग ने हार्वर्ड स्कूल को रिसर्च प्रोजेक्ट की इजाजत देते हुए कुछ शर्तें लगाई हैं और कहा कि रिसर्च टीम को केंद्र सरकार से रिसर्च वीजा लेना होगा. रिसर्च के चलते स्कूलों में पढ़ाई डिस्टर्ब नहीं होनी चाहिए. बच्चों और उनके पैरंट्स के पते और फोन नंबर नहीं दिए जाएंगे. 

रिसर्च स्टडी पब्लिश करने से पहले शिक्षा निदेशक को दिखानी होगी. सरकार ने साफ कर दिया है कि रिसर्च के लिए दी गई मंजूरी को किसी भी समय वापस लिया जा सकता है. शिक्षा विभाग ने इस मसले पर एक नोडल ऑफिसर भी नियुक्त किया है.

Source - Hindi.indiasamvad.co.in

Follow by Email