Text of PM's address at International Conference on Consumer Protection

मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री राम विलास पासवान जी, श्री सी. आर. चौधरी जी, UNCTAD (अंकटाड) के सेक्रेटरी जनरल डॉक्टर मुखीसा किटूयी जी, और यहां उपस्थित अन्य महानुभाव, 

सबसे पहले आप सभी सभी को consumer protection जैसे महान विषय पर International Conference के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। 

इस कार्यक्रम में दक्षिण एशिया, South-East Asia और East Asia के कई देशों के प्रति‍निधि भी आज हमारे बीच में शामिल हैं। मैं आप सभी का इस कार्यक्रम में हृदय से बहुत-बहुत स्‍वागत करता हूं। 
दक्षिण एशिया में ये अपनी तरह का ये पहला आयोजन है। मैं UNCTAD का भी आभारी हूं, जिसने भारत की इस पहल को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया और उसे इस स्‍वरूप तक लाने में सक्रिय भूमिका निभाई। 

सा‍थियो, दुनिया का ये भू-भाग जिस तरह एक-दूसरे से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा हुआ है, वैसा अन्‍य जगहों पर कम ही देखने को मिलता है। हजारों वर्षों से हम trade, culture, religion ऐसे कई पहलू से जुड़े हुए हैं। Costal Economy ने इस भू-भाग को connect करने के लिए सदियों से अहम योगदान दिया है। लोगों का आना-जाना, विचारों का आदान-प्रदान, एक two-way process रहा है। जिसका लाभ इस क्षेत्र के हर देश को कम-अधिक मात्रा में मिलता रहा है। हम आज भी सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि सांस्‍कृतिक तौर पर भी एक shared heritage का प्रतीक हैं। 

सा‍थियो, आज के modern era में हमारे पारस्‍परिक संबंध एक नये आयाम पर पहुंचे हैं। एशिया के देश न सिर्फ अपने देश पर goods और market services को cater कर रहे हैं बल्कि उनका विस्‍तार दूसरे महाद्वीपों तक भी फैलता चला जा रहा है। इसमें consumer protection ऐसा विषय है, जो इस क्षेत्र में व्‍यापार को बढ़ाने, उसे और मजबूत करने का एक important component है। 

आज का ये आयोजन इस बात का प्रतीक है कि हम अपने नागरिकों की आवश्‍यकताओं को किस तरह गंभीरता से समझते हैं; उनकी दिक्‍कतों को दूर करने के लिए किस तरह से गंभीरतापूर्वक प्रयास करते हैं। हर नागरिक एक consumer भी होता है, और इसलिए ये आयोजन हमारे collective determination का भी प्रतीक है। 

सा‍थियो, इस पूरी प्रक्रिया में संयुक्‍त राष्‍ट्र का एक सहयोगी तौर पर आगे आना भी एक बहुत ही सुखद बात है। Nineteen Eighty Five (1985) में पहली बार consumer protection पर UN Guidelines बनी थीं। दो वर्ष पूर्व ही इसमें और सुधार किया गया है। सुधार की इस प्रक्रिया में भारत की भी सक्रिय भूमिका रही है। 

और मैं डॉक्टर मुखीसा का आभारी हूं, उन्‍होंने जिस प्रकार से भारत की सराहना की। अनेक क्षेत्र में भारत जिस बातों को lead ले रहा है, उसका भी उन्‍होंने बहुत ही उत्‍तम तरीके से जिक्र किया, मैं इसलिए उनका हृदय से बहुत आभारी हूं। 

विकासशील देशों में sustainable consumption in commerce और finical service के संबंध में ये guidelines बहुत ही महत्‍वपूर्ण हैं। 

साथियो, भारत में सैंकड़ों, हजारों वर्षों से consumer protection, Governance का अभिन्‍न हिस्‍सा रहा है। हजारों वर्ष पूर्व रचित हमारे वेदों में उपभोक्‍ता संरक्षण की एक व्‍यापक चर्चा है। अथर्व वेद में कहा गया है- 

“इमा मात्रा मिमीम हे यथ परा न मासातै” 

यानी वस्‍तुस्थिति और नाप-तौल में किसी भी तरह की गड़़बड़ी न करें। 

ऋगवेद में कहा गया है- हजारों वर्ष पूर्व रचित ग्रंथों में consumer protection के बकायदा नियम समझाए गए हैं। गलत तरीके से trade करने वाले को किस तरह की सजा दी जाए, उसे भी उस क्षेत्र समय में वर्णित किया गया है। 

आप जान करके हैरान होंगे कि लगभग ढाई हजार साल पहले, कौटिल्‍य के समय में, बाकायदा शासन के लिए guidelines परिभाषित की गई थीं कि कैसे trade का regulate किया जाएगा और कैसे सरकार उपभोक्‍ता के हितों की रक्षा करेगी। 

कौटिल्‍य-काल में शासन द्वारा जिस तरह की व्‍यवस्‍था थी, आज के हिसाब से अगर उन पदों को हम आज के terminology में रखें तो उसका मतलब होता है; director of trade, superintended of standards; मैं समझता हूं कहा जा सकता है। 

हमारे यहां ग्राहक को भगवान माना जाता है। कई दुकानों में आपको लिखा मिल जाएगा- ग्राहक देवो भव: । चाहे कोई भी business हो, उसका एकमात्र मकसद Consumer की सं‍तुष्टि होना चाहिए। 

साथियों, भारत उन कुछ देशों में शामिल रहा है जिसने UN guidelines Adopt होने के अगले ही साल यानि 1986 में ही अपना Consumer Protection Act लागू कर दिया था। 

उपभोक्ता के हितों का ध्यान इस सरकार की प्राथमिकताओं में से एक प्रमुख अंग है। सरकार की ये प्राथमिकता New India के संकल्प के साथ भी पूरी तरह जुड़ी हुई है। New India, जहां Consumer Protection से आगे बढ़कर Best Consumer Practices और Consumer Prosperity की भी बात को हम बल दे रहे हैं। 

साथियों, हम आज की देश की जरूरतों को, आज के व्यापारिक तौर-तरीकों को ध्यान में रखते हुए एक नया Consumer Protection Act already process में है, हम बना रहे हैं। नए कानून में Consumer Empowerment पर विशेष जोर दिया जा रहा है। Consumer की परेशानी कम समय में, कम खर्च में दूर हो, इसके लिए नियमों को और अधिक सरल किया जा रहा है। Misleading विज्ञापनों पर और सख्ती का प्रावधान किया जा रहा है। तुरंत सुनवाई के लिए Executive powers के साथ Central Consumer Protection Authority का भी गठन किया जाएगा। 

हमने Real Estate Regulatory Act बनाया है, जिससे घर खरीदने वाले उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण हुआ है, और विशेष करके मध्‍यम वर्ग, निम्‍न वर्ग का व्‍यक्ति जो जीवन की पूरी कमाई घर बनाने के लिए खर्च कर देता है; उसके लिए protection मतलब, उसकी पूरी एक जिंदगी के अरमानों के protection का दायरा बन जाता है। पहले, बिल्डरों की मनमानी की वजह से वर्षों तक लोगों को अपने घरों के लिए इंतजार करना पड़ता था। फ्लैट के एरिया को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी रहती थी। अब इस नए कानून RERA के बाद केवल Registered developers ही सभी आवश्यक permission प्राप्त करने के बाद घर की booking कर सकेंगे। सिर्फ एक pamphlet छापकार ही लोगों के रुपये नहीं बटोर सकते हैं। इसके साथ ही सरकार ने booking amount की सीमा को भी 10 प्रतिशत पर फिक्स कर दिया है, वरना पहले advance में 25, 30, 40 percent तक, 50 percent तक लोगों से पैसे हथिया लिए जाते थे। 

पहले ये होता था कि बिल्डर, घरों की बुकिंग के बाद मिलने वाले जो पैसे होते थे उसको दूसरे प्रोजेक्ट में लगा देते थे। अब सरकार ने ऐसा प्रावधान किया है कि खरीदार से मिलने वाली 70 प्रतिशत राशि “Escrow” अकाउंट में डालनी होगी और ये राशि उसी प्रोजेक्ट पर ही खर्च की जाएगी। 

इसी तरह ब्यूरो ऑफ Indian Standard Act भी बनाया गया है। अब Public या Consumer Interest से जुड़ी किसी भी वस्तु या सेवा को compulsory certification के अंतर्गत लाया जा सकेगा। और इसके तहत खराब क्वालिटी की वस्तुओं को बाजार से Recall करने और उससे अगर उपभोक्ता को नुकसान हुआ है, तो उसकी Compensation का भी प्रावधान किया गया है।

अभी हाल ही में भारत ने Goods And Services Tax- GST को भी लागू किया है। GST के बाद देश में अलग-अलग तरह के दर्जनों Indirect Tax का जाल खत्म हुआ है। कितने ही तरह के Hidden Tax अब खत्म हो चुके हैं। उपभोक्ता को अब सामने receipt पर दिखता है कि उसने कितना टैक्स राज्य सरकार को दिया, कितना टैक्‍स केंद्र सरकार को दिया। बॉर्डर पर ट्रकों का लगने वाला लंबा जाम भी खत्म हो गया है। 

GST से देश को एक नया business culture मिल रहा है और Long Term में GST का सबसे बड़ा फायदा Consumers को ही होने वाला है। मध्‍यम वर्ग, निम्‍न वर्ग, गरीब; जिसका अज्ञान का लाभ उठाया जाता था; जैसे-जैसे लोगों को इसकी जानकारी मिलती जाएगी, ग्राहक जागरूक होता जाएगा और कहीं पर भी आप कोई भी उसका cheating नहीं कर पाएगा। ये एक पारदर्शी व्यवस्था है जिसमें कोई Consumers के हितों के साथ खिलवाड़ नहीं कर पाएगा। इतना ही नहीं, GST की वजह से जब कंपनियों का आपस में competition बढ़ेगा, और बढ़ने वाला है; तो चीजों की कीमतों में भी बहुत गिरावट आएगी, कमी आएगी। और इसका सीधा फायदा भी गरीब और मध्यम वर्ग के Consumers को होने वाला है। 

अब देखिए, transportation, जो ट्रक पांच दिन में जाती थी, अब सारे check post हटने के कारण वो तीन दिन में जा रही है। इसका मतलब कि जो सामान ढो करके जाने का खर्च होता था उसमें कटौती आई है। ये आने वाले दिनों में consumer को transfer होने ही वाला है। आज भले ही कोई लोग अज्ञान का लाभ उठाते होंगे, लेकिन सारी चीजों का फायदा आने वाले दिनों में ग्राहक को, मध्‍यम वर्ग, निम्‍न-मध्‍यम वर्ग, गरीब को, उसको transfer होने ही वाला है। 

साथियों, कानून के माध्यम से उपभोक्ता के हितों को मजबूत करने के साथ ही ये भी बहुत आवश्यक है कि लोगों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई हो। Ultimately democracy की ताकत grievance redressal में होती है। लोकतंत्र का अहम, grievance redressal system कितनी आपकी powerful है; इस पर लेखा-जोखा होता है। पिछले तीन वर्षों में technology का इस्तेमाल करते हुए हमारी सरकार ने Grievance redressal का एक नया Eco-system तैयार किया है। 

National Consumer Helpline की क्षमता को 4 गुना बढ़ाया जा चुका है।Consumer Protection से जुड़े portal और social media को भी integrate किया गया है। Portal से निजी कंपनियां भी बड़ी संख्या से जुड़ रही हैं। Portal के माध्यम से लगभग 40 प्रतिशत शिकायतें सीधे कंपनियों के पास automatic transfer हो जाती हैं जिन पर तेजी से कार्रवाई होती है। जागो-ग्राहक जागो- इस अभियान के माध्यम से भी उपभोक्ताओं को जागरूक करने का एक व्‍यापक प्रयास निरंतर चलता रहता है। मैं बड़े संतोष के साथ कह सकता हूं कि Consumer Protection में जिस तरह social media का Positive तरीके से इस्तेमाल इस सरकार ने किया है, वैसा देश में पहले कभी नहीं किया गया। 

साथियों, मेरी नजर में और हमारी सरकार के vision में Consumer Protection का दायरा बहुत ही विस्तृत है। किसी भी देश का विकास और Consumer Protection एक दूसरे के पूरक होते हैं, वो जुड़वां भाई होते हैं। विकास का फायदा हर नागरिक तक पहुंचे, इसके लिए Good Governance, इसकी भी बहुत बड़ी भूमिका रहती है। 

जब आप सरकार के नाते ये सुनिश्चित करते हैं कि नागरिक तक उसके अधिकार पहुंचें, नागरिक तक वो सेवाएं पहुंचे, जिनसे वो अज्ञानवश वंचित रह जाता है, तब भी आप Consumer के हितों को Protect करते हैं; ये good governance के माध्‍यम से संभव होता है। देश के लोगों को Clean Energy के लिए उज्ज्वला योजना, health and hygiene के लिए स्वच्छ भारत अभियान, Financial inclusion के लिए जन-धन योजना, ये ऐसी कई योजनाएं हैं; इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। 2022 तक, जबकि आजादी के 75 साल हो रहे हैं, और भारत जब आजादी के 75 साल मना रहा है, तब 2022 तक देश के हर व्यक्ति के पास अपना घर हो, इस पर भी सरकार बहुत व्‍यापक रूप से काम कर रही है। 

अभी हाल ही में देश के हर घर में बिजली connection पहुंचाने के लिए भी एक बहुत बड़ा initiative लिया गया है, एक बहुत बड़ी योजना शुरू की गई है। ये सारे प्रयास लोगों के Basic Life Line सपोर्ट देने के साथ ही उनकी जिंदगी आसान बनाने के लिए भी हैं। 

Consumer के हितों की रक्षा सिर्फ उसे अधिकार देने से ही पूरी नहीं होती है। भारत में हम उस दिशा में भी काम कर रहे हैं जहां सरकार की योजनाएं Consumer के पैसे बचाने में मददगार साबित होनी चाहिए और हो रही हैं। इन योजनाओं से सबसे ज्यादा फायदा देश के गरीब, निम्‍न–मध्‍यम वर्ग, मध्यम वर्ग, ऐसे समाज के एक बहुत बड़े दायरे को होता है। वो law abiding citizen होते हैं। वे कानून का पालन करने वाले मध्‍यमवर्गीय लोग होते हैं। उनको हम जितना sport देंगे, उतनी हमारी व्‍यवस्‍थाएं और अधिक ताकतवर बनेंगी। 

आपको जानकारी होगी कि UNICEF ने अभी हाल ही में भारत में एक सर्वे के नतीजों की घोषणा की है। सर्वे के मुताबिक स्वच्छ भारत मिशन के बाद जो गांव खुले में शौच से मुक्त हो गए हैं, उन गांवों में प्रत्येक परिवार को सालाना 50 हजार रुपयों की बचत हो रही है। वरना यही राशि उस परिवार को बीमारियों के इलाज, अस्पताल आने-जाने, और दफ्तर से ली गई छुट्टियों आदि पर खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ता था। अब ये consumer की नजर से देखें हम इस घटना को तो हमने उसके 50 हजार रुपये बचाना, ये अपनी उसकी एक consumer के नाते purchasing power भी बढ़ाते हैं और उसकी अर्थव्‍यवस्‍था को priority देने के लिए हम सुविधा provide करते हैं। 

साथियों, गरीबों को सस्ती दवा के लिए भारतीय जनऔषधि परियोजना हमने प्रारंभ की है। 500 से ज्यादा दवाइयों की कीमत को कम करके उन्हें आवश्यक दवाइयों की लिस्ट में रखा गया है। स्‍टेंट की कीमत में capping करके स्‍टेंट को 85 प्रतिशत तक सस्ता किया गया है। मध्‍यम वर्ग का परिवार, अगर परिवार के एक व्‍यक्ति को हृदय की बीमारी हो जाए और स्‍टेंट लगवाना हो तो ढाई लाख, तीन लाख, दो लाख; कहां से खर्च करेगा? सरकार ने intervention किया, as a consumer एक heart patient, consumer भी है और उसको अगर 85 percent कम कीमत से वी स्‍टेंट मिल जाए; मैं समझता हूं आधी हृदय की बीमारी तो यूं ही चली जाएगी। यही तो consumer protection होता है। हाल ही में घुटने के implants की कीमत को भी सरकार ने नियंत्रित कर दिया है। आज शायद ही कोई परिवार होगा जहां 50 के बाद घर में घुटने की शिकायत वाले लोग न मिलें। और फिर डॉक्‍टर्स तो बता देते हैं बस mechanical engineering में जैसे पुर्जा बदल देते हैं, आओ पुर्जा बदल देते हैं, और फिर वो बहुत बड़ा लम्‍बा-चौड़ा बिल दे देते हैं। हमने इसके लिए व्‍यवस्‍था की, उसकी कीमतें कम की। जो retired लोग हैं, जो pensioners हैं, वे consumer भी हैं। उस आयु में उनको इतनी बड़ी मदद, मैं समझता हूं pension की बढ़ोत्‍तरी से भी ये बचत उसको ज्‍यादा ताकत और विश्‍वास देती है। ये काम सरकार का approach है। 

हमारी सोच Consumer Protection से आगे जाकर Consumer Interest Promotion की ओर भी है। Consumer Interest में लोगों के पैसे बचाने का एक और उदाहरण मैं आपके सामने रखता हूं और वो है हमारी उजाला स्कीम। ये पूरी स्‍कीम सिर्फ consumer के हित में ही सीमित नहीं है, consumer के interest की भी चिंता करती है। आपने देखा होगा, वैसे चीज बहुत छोटी लगती है, लेकिन इसका प्रभाव कितना होता है, उजाला योजना। ये साधारण सी स्कीम है LED बल्ब के वितरण की, लेकिन परिणाम असाधारण हैं। 

जब ये सरकार आई थी तो एक LED बल्ब, उसकी कीमत 350 रुपये से ज्यादा में वो बिकता था। सरकार ने उसमें intervention किया, बा‍रीकियों में देखा, LED का बल्‍ब production, उसकी दिशा में देखा। मार्केट बने, इसकी चिंता की। और जो बल्‍ब साढ़े तीन सौ रुपये में बिकता था, अब उजाला स्कीम के तहत केवल 40-45 रुपये में वो बल्‍ब उपलब्ध है। अब कोई मुझे बताए कि देश के मध्‍यम वर्ग के व्‍यक्ति के जेब में पैसा बचा कि नहीं बचा? उसके interest को protect किया कि नहीं किया? LED बल्ब की कीमत कम करके और लोगों के बिजली बिल में बचत कराकर सरकार ने सिर्फ इस एक योजना से consumer के, उपभोक्ताओं के करीब-करीब 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा, उनके जेब में पूरे देश में बचाए हैं, एक साल में। क्‍योंकि बिजली का बिल कम हो गया इसके कारण। 20 हजार करोड़ रुपये, अगर पुरानी सरकारों की तरह, अगर हम रेवड़ी बांटने के लिए लगा देते तो जय-जयकार करने वालों की कमी नहीं थी। 

लेकिन हमने कठिन रास्‍ते चुने लेकिन consumer के interest को पूरे करने के तरीके के साथ जुड़े रहे। 20 हजार करोड़ रुपये कम नहीं होता है। इतने मिले बिजली बचने के कारण। Environment में कितना फायदा हो रहा है। अगर इतनी ही बिजली का कारखाना लगाना होता तो शायद 50-60 हजार करोड़ रुपये, उतनी बिजली उत्‍पादन के लिए कारखाने लगाने पड़ते; वो तो एक extra benefit हुआ है। 

साथियों, Inflation पर लगाम लगाने की वजह से भी और उसकी वजह से गरीब और मध्यम वर्ग के Consumers का आर्थिक फायदा हुआ है। जिस तेजी से Inflation बढ़ रहा था, 2012-13, 11, 12, 13 का समय देख लीजिए, अगर उसी रफ्तार से बढ़ता होता तो आज था कितनी महंगी होती, अगर इसका हिसाब लगाओगे तो कोई भी बड़ा अर्थशास्‍त्री चौंक जाता कि हिन्‍दुस्‍तान का आदमी खाता कैसे है? लेकिन इस सरकार ने कदम उठाए, Inflation को कम किया, थाली पर बढ़ने वाले बोझ को रोक दिया। कुछ कीमतों में सस्‍ता होने में सफल हुए, Inflation कम होता गया। इससे भी Consumer की जेब में पैसे बचे हैं, Consumers के interest की रक्षा हुई है। शायद ही मध्‍यम वर्ग, निम्‍न-मध्‍यम वर्ग के परिवारों की इतनी बारीकी से चिंता शायद ही इस देश में पहले कभी हुई होगी। 

टेक्नोलॉजी के माध्यम से Public Distribution System को मजबूत करके भी ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिस गरीब का सस्ते खाद्यान्न पर अधिकार है, उसे ही वो अनाज मिलना चाहिए, स्‍थायपन्‍न नहीं होना चाहिए। चोरी हो करके फ्लोर मिल में नहीं जाना चाहिए गेहूं, गरीब के पेट में जाना चाहिए। ये भी Consumers के interest के protection की हमारी commitment का उदाहरण है। 

Direct benefit scheme के तहत लाभार्थियों के bank account में सीधे पैसा transfer करके सरकार पे 57 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम को गलत हाथों में जाने से रोक दिया है। कोई तो थे बिचौलिए, कोई तो थे दलाल, जिनके पास ये पैसा जाता था। आधार की सबसे बड़ी सफलता ये है कि जिसका हक है उसको हक का देने में आधार एक बहुत बड़ी भूमिका अदा कर रहा है। और 57 हजार करोड़ रुपया प्रतिवर्ष, एक वर्ष नहीं- प्रति वर्ष। 57 हजार करोड़ रुपये चोरी होती थी और उसको भ्रष्‍टाचार के रूप में कभी बाजार के अखबारों में कभी छपा नहीं है वो। जैसे 2G का छपता था, कोयले का छपता था, इसका नहीं छपा; क्‍योंकि क्‍योंकि इतनी छोटी-छोटी रकमों की चोरी हुआ करती थी किसी को पता नहीं चलता था। 

Consumer के interest की चिंता करने के कारण सरकार ने technology का इस्‍तेमाल किया, transparency पर जोर लगाया और उसी का परिणाम है‍ कि जो हकदार हैं, उसका हक आज न कोई छीन सकता है; जिसका हक है उसको पूरा का पूरा, एक रुपये का 15 पैसे हुए बिना , एक रुपया का 100 पैसा उसके पास जा रहा है। ये काम Consumer interest का सबसे बड़ा उदाहरण है। 

साथियों, Sustainable Development Goals और उसकी प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि consumer भी अपने साझा उत्तरदायित्व समझते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। 

यहां इस अवसर पर मैं दूसरे देशों से आए हुए अपने साथियों को Give-it-up scheme के बारे में विशेष तौर पर बताना चाहूंगा। हमारे यहां रसोई गैस के सिलेंडर पर लोगों को subsidy दी जाती है। Clean cooking की तरफ हमारा बल है। लेकिन जब मैंने एक बार लाल किले से लोगों को अपील की लोगों को 15 अगस्‍त को कि अगर आप afford करते हैं तो आपको इतनी subsidy की क्‍या जरूरत है? सालाना 100-1500 रुपया लेकर क्‍या जरूरत है, आप छोड़ते क्‍यों नहीं? मैं आज बड़े संतोष के साथ कह सकता हूं और दुनिया का जो माहौल है उसके सामने भारत में सामान्‍य मानवी ने जो मिसाल दिखाई है, एक उदाहरण है। 

Ten Million से ज्‍यादा लोग, एक करोड़ से ज्‍यादा लोगों ने सिर्फ मेरे कहने मात्र से अपन gas subsidy को surrender कर दिया। मैं समझता हूं ये है partnership. जो गरीब है, सामान्‍य है जिसको अब व्‍यवस्‍था मिलनी चाहिए, जिसको अब व्‍यवस्‍था ने आगे बढ़ाया है, उसने छोड़ने के लिए आगे आना चाहिए। ये प्रयोग मैं समझता हूं, देश को एक नया भारत का परिचय करानी वाली बात है कि आज भी मेरे देश में वो इमानदारी, समाज के लिए कुछ करने की भावना जन-जन में व्‍यापत है और इस सरकार ने उसके साथ अपने-आपको connect किया है। लोगों ने जो गैस सब्सिडी छोड़ी, वो हमने सरकारी खजाने में नहीं डाली। हम तिजोरी भर सकते थे, लेकिन वो हमने काम नहीं किया। हमने उस गैस सब्सिडी का फायदा, जिनको लकड़ी के चूल्‍हे से रोटी पकानी पड़ती थी, जो मां बीमार हो जाती थी, जो environment को नुकसान होता था, हमने करीब 3 करोड़ परिवारों को जिसने कभी गैस का चूल्‍हा नहीं देखा था, clean cooking के लिए सोचा नहीं था, उनको मुफ्त में gas connection दे करके हमने इस बात को और transfer कर दिया। 

ये एक उदाहरण है कि कैसे प्रत्येक कन्ज्यूमर के shared contribution से दूसरे का फायदा होता है और समाज में भी अपने कर्तव्यों के प्रति एक positive, devoted भाव से एक नया माहौल बनता है। 

साथियों, सरकार देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं के Digital Empowerment के लिए, जैसे आपने उल्‍लेख किया डॉक्टर मुखीसा किटूयी जी ने; प्रधानमंत्री ग्रामीण Digital साक्षरता अभियान चला रही है। इसके तहत 6 करोड़ घरों में और हर घर में एक व्यक्ति को Digital रूप से साक्षर बनाने का एक बहुत बड़ा अभिायान भारत सरकार ने हाथ में लिया है। इस अभियान से गांव के लोगों को Digital लेन-देन, Digital तरीके से सरकारी सेवाओं को प्राप्त करने में और सहूलियत मिलेगी। वो दिन दूर नहीं होगा जब JAM connectivity- जन-धन, आधार, मोबाईल, पूरे governance के केंद्र बिंदु में ये JAM रहने वाला है। जन-धन, आधार, मोबाईल- एक अपने मोबाइल फोन पर वो सरकार से सीधा संपर्क कर सकें, वो दिन दूर नहीं है। लेकिन उसमें humanity source development के तहत भारत के 6 करोड़ ग्रामीण परिवारों में, हर परिवार में एक बंदा digitally literate हो, उसका एक बहुत बड़ा अभियान हमने चलाया है। 

भारत के गांवों में डिजिटल जागरूकता है। भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा e-commerce मार्केट को भी बल देने की संभावना मैं देख रहा हूं। Unified Payment Interface- UPI ने e-commerce इंडस्ट्री को एक बहुत बड़ी ताकत दी है। Bharat Interface For Money- यानि BHIM App ने शहरों के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी डिजिटल पेमेंट का एक व्‍यापक विस्तार किया है। 

साथियों, सवा सौ करोड़ से ज्यादा की जनसंख्या और तेजी से बढ़ते मिडिल क्लास की वजह से भारत दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। हमारी अर्थव्यवस्था का खुलापन, दुनिया के हर देश का स्वागत करता है, भारतीय उपभोक्ताओं को Global Players की ओर, और निकट लाने की संभावना बनाता है। Make in India के माध्यम से हम Global Companies को भारत में ही Produce करने और यहां के विशाल मानव संसाधन का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए एक platform दे रहे हैं, और निमंत्रण भी दे रहा है। 

साथियों, धरती के इस हिस्से में ये अपनी तरह की पहली conference है। हम में से प्रत्येक देश अपने-अपने तरीके से अपने देश के उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने में जुटा हुआ है। लेकिन हमें ये भी ध्यान में रखना होगा कि बढ़ते हुए Globalization के साथ पूरा विश्व एक Single Market की ओर आगे बढ़ रहा है। और इसलिए इस तरह के आयोजन के माध्यम से एक दूसरे के अनुभवों से सीखना, Common Understanding के बिंदु तलाशना और Consumer Protection से जुड़े किसी Regional Coalition के निर्माण की संभावनाओं पर चर्चा, मैं समझता हूं बहुत ही अहम है, महत्‍वपूर्ण है। 

400 करोड़ से ज्यादा का consumer base, बढ़ती हुई purchasing power, Young Demographic Profile, हम एशियाई देशो में एक बिजनेस का बहुत बड़ा आधार है। E-commerce और लोगों की बढ़ती Trans-border mobility की वजह से आज Cross-Border Transaction लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में Consumer का भरोसा बनाए रखने के लिए ये बहुत आवश्यक है कि हर देश में मजबूत regulatory system हो और उस system के बारे में दूसरे देशों को भी आवश्यक जानकारी हो। दूसरे देशों के उपभोक्ताओ से जुड़े मामलों में तेजी से की गई कार्रवाई करने के लिए Co-operation का frame work होना भी उतना ही आवश्‍यक है। इससे आपसी विश्वास बढ़ेगा और व्यापार की पहली शर्त होती है विश्‍वास। रुपये व्‍यापार को जितना बढ़ाते हैं उससे ज्‍यादा विश्‍वास व्‍यापार को बढ़ाता है। 

Communication के लिए Structured Mechanism बनाना, Best Practices की Mutual Sharing करना, Capacity building के लिए नए Initiatives लेना और Joint Campaigns शुरू करना; ऐसे विषय हैं जिन पर आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य किया जा सकता है। 

साथियों, हमारी सांस्कृतिक और व्यापार की साझा विरासत भविष्य में उतनी ही मजबूत होगी, जितना हमारे बीच भावनात्मक संबंध मजबूत होंगे। अपनी संस्कृति पर गर्व के साथ ही दूसरों की संस्कृति का सम्मान हमारी परंपरा का हिस्सा है। सदियों से हम एक-दूसरे से सीखते रहे हैं और Trade और Consumer Protection भी इससे अछूता नहीं रहा है। 

मुझे उम्मीद है इस conference में भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, एक स्पष्ट vision के साथ आगे बढ़ने का roadmap तैयार होगा। मुझे उम्मीद है कि हम इस conference के माध्यम से एक Regional Co-operation को institutionalize करने में भी सफल होंगे। 

इस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए मैं आपका एक बार फिर से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं, मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं और मैं इस conference को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। 

बहुत-बहुत धन्यवाद !!! - PIB

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