तानाशाह की सीक्रेट यात्राः खास ट्रेन से चीन पहुंचा किम जोंग उन


26 मार्च यानी सोमवार को 21 बोगी वाली एक स्पेशल ट्रेन उत्तर कोरिया की राजधानी प्य़ोंगयांग से बेहद खामोशी से रवाना होती है. इस ट्रेन को 1400 किलोमीटर का सफर तय कर चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचनी थी. ट्रेन की हर बोगी में उत्तर कोरिया के सबसे जांबाज कमांडोज और जासूस सवार थे और इसी ट्रेन की एक बोगी में वो भी सवार था. वो, जो 17 साल के लंबे अर्से बाद पहली बार अपने मुल्क की सरहद से बाहर निकल रहा था.

चीन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
26 मार्च यानी सोमवार को चीन की राजधानी बीजिंग के रेलवे स्टेशन पर अचानक हलचल तेज हो जाती है. स्टेशन के बाहर सड़कों को खाली कराया जाता है. मोटरसाइकिल पर सवार चीनी जवान स्टेशन के इर्द गिर्द पूरी मुस्तैदी से तैनात थे. इसके बाद दोपहर होते-होते पीली धारी वाली हरे रंग की एक ट्रेन सटेशन पर पहंचती है. जबरदस्त सुरक्षा घेरे के बीच उस ट्रेन की बोगी से बाहर विकले एक शख्स को चीनी सुरक्षा अधिकारी अपने घेरे में ले लेते हैं और फिर गाड़ियों का काफिला स्टेशन से रवाना हो जाता है.

किम ने चीन पहुंच कर दुनिया को चौंकाया

ख़बरों पर यकीन करें तो इस ट्रेन में कोई और नहीं बल्कि उत्तर कोरिय़ा के तानाशाह मार्शल किम जोंग उन सवार थे. जो उस वक्त चीन पहुंचे थे. कहां तो ख़बर ये आ रही थी कि मई में मार्शल किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्पति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात होने जा रही है. मगर 2018 की इस सबसे बड़ी राजनीतिक घटना से पहले ही मार्शल किम जोंग उन ने अमेरिकी राष्ट्रपति से पहले चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात कर एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया. ख़बरों के मुताबिक सोमवार को किम जोंग उन अपने सबसे पुराने और भरोसेमंद साथी चीन से हाथ मिलाने के लिए अचानक बीजिंग पहुंच गए. वो भी स्पेशल ट्रेन से. हालांकि इस खबर की पुष्टि अभी तक ना तो चीन ने की है और ना ही उत्तर कोरिय़ा ने.

21 बोगियों वाली हरी ट्रेन में सवार थे किम

मगर सूत्रों और चश्मदीदों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच सोमवार को बीजिंग में लंबी मुलाकात हुई. ख़बरों के मुताबिक उत्तर कोरिया के शहर प्योंगयांग से किम जोंग उन 21 बोगियों वाली स्पेशल ट्रेन से बीजिंग के लिए रवाना हुए थे. प्योंगयांग से चीन का पहला रेलवे स्टेशन डांगडोंग पड़ता है और डांगडोंग से बीजिंग की दूरी 1100 किलोमीटर है. जिसे तय करने में करीब 12 घंटे का वक्त लगता है. डांगडोंग के निवासियों के मुताबिक रविवार को यहां से एक स्पेशल ट्रेन गुजरी थी. हरे रंग की उस ट्रेन में पीले रंग की लाइन खिंची थी. 21 बोगियों वाली इस ट्रेन में ज़बरदस्त सुरक्षा इंतजाम थे. ट्रेन की एक बोगी में किम जोंग उन सवार थे.

सुरक्षा के बीच विशेष कार से ग्रेट हाल पहुंचे किम

खबरों के मुताबिक ये ट्रेन सोमवार दोपहर को बीजिंग पहुंची. बीजिंग के चंगन एवेन्यू पर सोमवार की दोपहर से शाम तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. यहां तक कि थॉनमन चौक भी पूरी तरह खाली करा लिया गया था. अमूमन ऐसा तभी होता है, जब कोई वीवीआईपी मेहमान चीन आता है और उसके साथ ग्रेट हॉल में कोई अहम बैठक होती है. ग्रेट हॉल के बाहर भी सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था थी. चश्मदीदों के मुताबिक बीजिंग में दायुताई गेस्ट हाउस में एक बड़ी सी लीमोजीन कार मोटर बाइक पर सवार पुलिस एस्कॉर्ट के बीच पहुंची. ख़बर है कि उसी लीमोजीन में किम जोंग उन सवार थे.

सुरक्षा कारणों से बख्तरबंद ट्रेन में सफर

वैसे आपको बता दें कि ये वही हरे रंग की बख्तरबंद ट्रेन है, जिससे उत्तर कोरिया के मार्शल किम जोंग उन के पिता किम जोंग-इल भी 2011 में चीन पहुंचे थे. तब भी उनकी इस यात्रा की ख़बर दुनिया को तब लगी जब वो वापस उत्तर कोरिया पहुंच गए थे. किम जोंग इल इसी ट्रेन से रूस भी जा चुके थे. अमूमन उत्तर कोरिया के राष्ट्राध्यक्ष देश के अंदर या बाहर इसी ट्रेन से सफर करते हैं. सुरक्षा कारणों से वो प्लेन में उड़ना पसंद नहीं करते.

अहम है ये मुलाकात

माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति से मई में मुलाकात करने से पहले किम जोंग उन अपने सबसे पुराने साथी चीन को भरोसे में लेना चाहता है. उत्तर कोरिया ड्रैगन को नाराज कर अमेरिका के साथ कभी कोई समझौता या डील नहीं कर सकता. इसीलिए चीन और उत्तर कोरिया की ये बेहद गोपनीय मीटिंग बेहद अहम मानी जा रही है.

Source - Aaj Tak

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