मुजफ्फरपुर रेप कांड : नीतीश कुमार ने कहा- महिलाओं पर अपशब्द बोलने वाले कैंडिल मार्च कर रहे हैं



मुजफ्फरपुर रेप केस मामले में सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि यह घटना निंदनीय और शर्मनाक है. लेकिन इस घटना को लेकर एक गलत वातावरण बनाया जा रहा है. हाईकोर्ट की निगरानी में जांच हो रही है. जांच तेजी से हो रही है. हमने रिपोर्ट आते ही कार्रवाई की है. नीतीश कुमार ने दिल्ली में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की अगुवाई में हुये कैंडल मार्च पर निशाना साधते हुये कहा कि जिन लोगों ने महिलाओं को अपशब्दों कहे वह कैंडल मार्च कर रहे हैं. जब उनसे राज्यपाल की चिट्ठी और बीजेपी नेता सीपी ठाकुर की ओर से मंजू वर्मा के इस्तीफा की मांग पर बीजेपी के खेल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सबको बोलने का अधिकार है. बीजेपी के सांसद की ओर जो कुछ बोल गया है उसमें ऐसा कुछ नहीं है कि प्रतिक्रिया जाए. समाज कल्‍याण मंत्री मंजू वर्मा की मामले में संलिप्‍तता को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में नीतीश कुमार ने कहा कि यह सब आधारहीन आरोप हैं. उन्‍होंने कहा कि यदि कोई मंत्री का संबंधी इस मामले में संलिप्‍त होंगे तो उसे भी नहीं छोड़ा जाएगा. लेकिन यह मसला अभी क्‍यों उठाया जा रहा है. मैंने उन्‍हें (समाज कल्‍याण मंत्री मंजू वर्मा) बुलाया और उनसे पूछा. लेकिन वो इस मामले में किसी प्रकार की संलिप्‍तता से इंकार कर गईं. आधारहीन आरोपों को कैसे जस्टिफाई किया जाएगा?​



नीतीश कुमार ने कहा कि दिल्ली में हुआ धरना सिर्फ इसलिये हुआ कि देश में भ्रष्टाचार कोई मुद्दा न रहे. सत्ता में रहने और माल बनाओ यह कोई मुद्दा नहीं है. वहीं मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम कांड में बिहार सरकार की मंत्री और जेडीयू नेता मंजू वर्मा के पति का नाम सामने आने के मामले में अब बीजेपी दो धड़ों में बंटी नज़र आ रही है कल पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी ठाकुर ने कहा था कि CBI की जांच पूरी होने तक मंजू वर्मा को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. पार्टी के कुछ और नेता सीपी ठाकुर की लाइन कह रहे हैं. लेकिन डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने आज ट्वीट कर कहा कि. मंजू वर्मा पर कोई आरोप नहीं है बीजेपी उनके साथ खड़ी है. 

मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड के घटनाक्रम

29 जुलाई 2018: मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड में CBI ने आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया. 

28 जुलाई को 2018: मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय रेप कांड में 42 में से 34 बच्चियों से रेप की पुष्टि हुई.

26 जुलाई 2018: बिहार सरकार ने मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में लड़कियों के यौन उत्पीड़न मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की.

25 जुलाई 2018: तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी दलों के नेता मुज़फ्फ़रपुर आये. सीबीआई जांच की मांग. रवि रोशन की पत्नी ने समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति पर गंभीर आरोप लगाये.

24 जुलाई 2018: लोकसभा में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर बिहार सरकार चाहे तो हम सीबीआाई जांच के लिए तैयार हैं.

23 जुलाई 2018: मुजफ्फरपुर बालिका गृह के परिसर में ज़मीन की खुदाई हुई, मगर शव का कोई अवशेष नहीं मिला. इसके अलावा इसी दिन संसद में भी यह मामला उठा.

20 जुलाई 2018: पॉक्सो कोर्ट ने बालिका गृह में मृत बच्ची के शव की खोज के लिए ज़मीन खोदने का आदेश दिया. इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट में भी बलात्कार की पुष्टि हुई. 

19 जुलाई 2018: पटना में एक बच्ची ने बयान दिया कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में एक बच्ची की बलात्कार के बाद का हत्या कर दी गई. इसके बाद मामला और भी ज्यादा गरमा गया.

09 जुलाई 2018: मुजफ्फरपुर बालिका गृह में बच्चियों के साथ बलात्कार मामले में पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब मांगा.

03 जुलाई 2018: सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर.

27 जून 2018: मुजफ्फरपुर बाल संरक्षण अधिकारी रवि रोशन को पुलिस ने गिरफ्तार किया. 

25 जून 2018: बालिका गृह की 22 बच्चियों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए गये. बच्चियों ने कोर्ट के समक्ष बताया कि उसे नशे की दवा खिला कर उसके साथ गलत काम किया जाता था. 

15 जून 2018: मुजफ्फऱपुर जिले में तैनात समाज कल्याण के दो अधिकारी को निलंबित किया गया.

03 जून 2018: बालिका गृह के संरक्षक और मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत आठ लोगों को गिरफ़्तार किया गया. 

02 जून 2018: पुलिस ने मुख्य आरोपी और बालिका गृह के संचालक ब्रजेश ठाकुर समेत एनजीओ से जुड़े करीब 8 लोगों को थाने में बुलाकर पूछताछ शुरू की और बालिका गृह को सील किया गया. 

31 मई, 2018: टिस की रिपोर्ट के मद्देनजर मुजफ्फरपुर बालिका गृह को खाली कराया गया और वहां की बच्चियों को पटना, मोकामा अन्य बालिका गृह में शिफ्ट किया गया. साथ ही पहली प्राथमिकी दर्ज की गई. 

26 मई, 2018 : टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की रिपोर्ट रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग के निदेशक तक पहुंची.

फरवरी, 2018 : टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस यानी कि टिस टीम ने बिहार के बालिका आश्रय गृह पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग को सौंपी. इस टीम ने अनपी ऑडिट में पाया था कि बालिका गृह का रख रखाव सही नहीं है और रिपोर्ट में बच्चियों के साथ दुर्रव्यवहार की शिकायतें भी मिली थीं.

Source - NDTV 


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