साउथ एशिया का पहला LGBTQ कोर्स लॉन्‍च, गे प्र‍िंस ने किया डिजाइन



भारत में LGBTQ आंदोलन में एक और उपलब्‍ध‍ि जुड़ गई है.

LGBTQ समुदाय विशेष पर दक्षिण एशिया का पहला शैक्षणिक मॉड्यूल पेश किया गया है.

इस शैक्षणिक मॉड्यूल का नाम 'Proclivity of Gender: Socio-legal approach to LGBTQ Community' रखा गया है.

यह एक तरह का कोर्स है जो पूरी तरह से LGBTQ समुदाय पर आधारित होगा. इसे अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा.



इसे अहमदाबाद की कर्णावती यूनिवर्सिटी में सोमवार को लॉन्च किया गया है. 


इसको लॉन्‍च करने का श्रेय भी LGBTQ समुदाय के आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता प्र‍िंस मानवेंद्र सिंह गोहिल के हिस्‍से गया है.

आपको बता दें कि मानवेंद्र सिंह गोहिल को गे प्र‍िंस के नाम से जाना जाता है. वे दुनिया के सामने खुद को समलैंगिक स्‍वीकार करने वाले देश के राजसी परिवार से जुड़े पहले व्यक्ति हैं.

यह पहली बार नहीं है कि LGBTQ समुदाय के लिए प्र‍िंस ने कुछ बड़ा किया हो. इससे पहले अपने शाही पैलेस को अब LGBTQ (लेजबियन, गे, बाइसेक्शुअल, ट्रांसजेंडर, क्वीर) कम्युनिटी के लिए पहला रिसोर्स सेंटर (lgbt क्लीनिक) के रूप में विकसित करने के लिए दे दिया है. इसके अलावा वह कई तरह से इस आंदोलन से जुड़े हुए हैं.

आपको बता दें कि इस कोर्स को यूनिवर्सिटी के लॉ ऐंड लिबरल स्टडीज के अंडरग्रैजुएट छात्र इसे पढ़ सकेंगे.

इसके अलावा 60 से ज्यादा प्रतिभागी उच्च माध्यमिक स्कूल के छात्र और पीएचडी स्कॉलर्स भी इस कोर्स में हिस्सा होंगे.

इस कोर्स के पीछे मकसद संयुक्त शिक्षा को बढ़ावा देना और थर्ड जेंडर के प्रति सामाजिक स्वीकृति को बढ़ाना है.

इस कोर्स में भारत में एलजीबीटीक्यू अधिकार आंदोलन का इतिहास, इसकी शुरुआत कैसे हुई, आंदोलनों का अंतर्राराष्ट्रीय संदर्भ, कानूनी अधिकार, आईपीसी की धारा 377 और समुदाय के सामाजिक-सांस्कृतिक से जुड़ी चीजें शामिल होंगी. मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, एचआईवी, मेडिकल और अन्‍य बीमारियां भी इस कोर्स में सम्मिलित होंगी. 

मानवेंद्र सिंह गोहिल का मानना है कि इससे छात्रों के बीच समुदाय को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और एलजीबीटी आंदोलन को मदद मिल सकेगी. 

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार इस कोर्स के संयोजक प्रफेसर श्रुत ब्रह्मभट्ट के अनुसार LGBTQ इस कोर्स को छात्रों को पढ़ाने से वह इस समुदाय से जुड़े मुद्दों और सदस्यों के प्रति संवेदनशील होंगे.'

Source - AajTak 


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