Mulk Movie Review: 'मुल्क' नहीं मजहब की कहानी है, समाज को दिखाएगी आईना



नाम फिल्म का 'मुल्क (Mulk)' है, लेकिन इसकी पूरी कहानी मजहब पर आधारित है. कहानी एक ऐसे मुस्लिम परिवार की है, जो बरसों से बनारस में बसा हुआ है. उनके घर के आसपास कई हिंदू रहते हैं और सालों से सब मिल जुलकर एक परिवार की तरह रह रहे हैं. सुबह की चाय से लेकर रात के जश्न में पकवान खाने तक. यह मोहल्ले वाले इनके सुख-दुख के साथी है. मुराद अली मोहम्मद (ऋषि कपूर) का परिवार इतना सैकुलर है कि इनके घर की बड़ी बहू (तापसी पन्नू) एक हिंदू है, जिसे घर में बेटी का दर्जा मिला है. कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब ऋषि कपूर का भतीजा जिहाद के नाम पर 16 लोगों को बम से उड़ा देता है और ये खबर पूरे देश में सनसनी की तरह फैल जाती है. शाहिद तो एंकाउंटर में मारा जाता है, लेकिन शक की सुई सीधे उनके परिवार खासकर उसके पिता बिलाल (मनोज पहवा) पर गिरती है. कोर्ट में उसे आतंकवादी साबित करने की कई दलीलें लगती है. इधर गाज बड़े भाई (ऋषि कपूर) पर भी गिरती है. परिवार की तरह मानने वाले उसके पड़ोसी उनपर आतंक फैलानी का आरोप लगाते है. अली परिवार पर चारों ओर ये घिनौने आरोप लगाए जाते हैं, ऐसे में क्या इनका बा-इज्जत बरी होना मुमकिन है? यह जानने के लिए आपको थिएटर का रुख करना होगा.



अभिनव सिन्हा का निर्देशन काफी कसा हुआ है. कहानी को उन्होंने इस अदा के साथ पेश किया है कि पर्दे से नजर हटाना मुश्किल है. इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि भरे थिएटर में दर्शक पिन ड्रॉप साइलेंस के साथ फिल्म का लुत्फ उठा रहे थे. बीच-बीच में वे ताली बजाना भी नहीं भूले. सबसे दिलचस्प ये है कि इसमें बेवजह गाने नहीं भरे गए हैं. फिल्म की शुरुआत में जश्न से भरा गाना सटीक बैठता है और आखिर में आपके कानों पर सुनाई देना वाला सूफी सॉन्ग भी खटकता नहीं.

तापसी पन्नू ने ग्लैमरस और सीरियस रोल निभाने में मानो महारत हासिल कर ली है. 'मुल्क' में वह एक बहू और वकील के किरदार में जची हैं. हालांकि, शुरुआत में एक-दो सीन में वह खटकती जरूर हैं. लेकिन कोर्ट रूम ड्रामा को तापसी ने बखूबी निभाया और अपने मोनोलॉग से साबित कर दिया कि वह किसी से कम नहीं. ऋषि कपूर ने भाई को इंसाफ दिलाने की लड़ाई लड़ी और एक परिवार में बड़े होने के नाते जो कर्तव्य निभाए जाता हैं, उसे शानदार तरीके से निभाना. आशुतोष राणा ने वकील के किरदार में चौंकाया. रजत कपूर, मनोज पहवा, नीना गुप्ता, प्राची शाह ने अपने-अपने हिस्से में जान डाली.

'मुल्क' का मुख्य उद्देश्य यह साबित करना है कि 'हर मुसलमान टेररिस्ट नहीं.' 'मुल्क' आज के समाज को आइना दिखाता है. रुढ़ीवादी सोच रखने वाले लोगों को एक बार यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए. हो सकता है कि मोहम्मद परिवार की दर्दभरी कहानी देख, उनका दिल में पिघल जाए. तकरीबन ढाई घंटे की फिल्म के डायरेक्टर कहीं भटके नहीं. उन्होंने लोगों तक संदेश सटीक तरीके से पहुंचाया. मसाला फिल्में पसंद करने वालों की आंखों में बेशक यह फिल्म खटकेगी. यदि आप सिनेमा के कंटेट को लेकर लंबे अरसे से शिकायत करते आ रहे हैं तो यह फिल्म आपके लिए ही बनी है. फिल्म का कंटेट जहां आपको सोचने पर मजबूर करेगा, वही इसका एंडिंग सीन आपकी आंखों में चमक ला देगा. फिल्म को मेरी ओर से 4 स्टार...

Source - NDTV 


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