UAE ने 700 करोड़ रुपए देने को कहा ही नहीं, तो ये बात कहां से आई



केरल में बाढ़ आई. तबाही मची. मदद की पुकार उठी. पूरा देश मदद के लिए आगे आया. दी लल्लनटॉप भी आगे आया. केंद्र से राज्य तक की सरकारों ने अपनी सुविधा मुताबिक मदद दी. देश ही नहीं, विदेश भी मदद के लिए आगे आए. बोले कि हम राहत और पुनर्वास में मदद करेंगे, आर्थिक मदद करेंगे. सबसे बड़ा दावा किया गया कि UAE 700 करोड़ रुपए की मदद ऑफर कर रहा है. लेकिन तभी नेताओं की तरफ से बतकही हो गई और सारी बातें रबड़ी के फालूदे की तरह उलझ गईं.


उलझनों की शुरुआत के कुछ स्टेप्स

स्टेप 1- दुबई के राजा साहब के तीन ट्वीट

केरल 8 अगस्त से बाढ़ से जूझ रहा है. 17 अगस्त को दुबई के शासक और UAE के उप-राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मख्तूम ने मलयाली में तीन ट्वीट किए. उन्होंने लिखा कि केरल अरब की सफलता में भागीदार रहा है, तो अब मुश्किल वक्त में वो केरल की मदद करेंगे और इसके लिए कमेटी बना दी गई है










केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने इसी दिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले दिन 18 अगस्त को ट्विटर पर मख्तूम का शुक्रिया अदा किया.


पी. विजयन और नरेंद्र मोदी के शुक्रिया वाले ट्वीट्स



 

स्टेप 2- दुकानदार ने सीएम को बताया कि राजा 700 करोड़ दे रहे हैं

21 अगस्त को पी. विजयन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्हें दुबई के लूलू सुपरमार्केट के एमए यूसुफ अली ने फोन पर बताया कि अबू धाबी के प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जाएद बिन सुल्तान अल नाहयान ने पीएम मोदी से कहा है कि वो केरल की मदद करेंगे. अब ये यूसुफ अली कहां से आ गए. उनका दुबई में लूलू सुपरमार्केट है, वैसा ही जैसे हमारे यहां बिग बाजार. यूसुफ केरल से ताल्लुक रखते हैं.

यूसुफ का परिचय खत्म. बैक टू प्रेस कॉन्फ्रेंस. पीसी में विजयन ने कहा कि हमें पता चला है कि UAE ने केरल की मदद के लिए 700 करोड़ रुपए की पेशकश की है. ये 700 करोड़ रुपए की बात उन्हें किसने बताई. यूसुफ अली ने. न तो UAE की तरफ से कोई चिट्ठी पत्री आई न ही बयान.

स्टेप 3- सरकारें कुछ नहीं बोलीं. सूत्र बोले, फिर सोशल मीडिया पर गदर कटा

विजयन के इस बयान पर न तो केंद्र सरकार ने कोई रिऐक्शन दिया और न UAE सरकार ने. लेकिन मीडिया में सूत्रों के हवाले से भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और केरल सरकार के बयान उड़ने लगे.

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से कहा गया कि 2004 में सुनामी के दौरान मनमोहन सरकार ने एक नीति बनाई थी कि अब से भारत अपने संसाधनों के बूते आपदाओं से निपटने की कोशिश करेगा और विदेशी मदद नहीं लेगा. तब से दिल्ली की हर सरकार इसी पॉलिसी पर काम कर रही है.

हालांकि, मनमोहन की ये पॉलिसी कागज़ पर नहीं थी. था तो सिर्फ उस समय के पीएम मनमोहन सिंह का बयान, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘मुझे लगता है कि हम अपने दम पर इस आपदा से निपट सकते हैं और ज़रूरत पड़ने पर ही हम उनकी मदद लेंगे.’

सूत्रों के हवाले से एक खबर और आई कि विदेश मंत्रालय ने विदेश स्थित अपने मिशंस को ये नोट भी भेजा कि अगर कोई विदेशी सरकार मदद ऑफर करे, तो उनका आभार जताएं और फिर उन्हें बताएं कि शुरुआती आकलन से लग रहा है कि भारत अपने बूते इस आपदा से निपट लेगा, तो अभी सरकार ने घरेलू प्रयासों पर निर्भर रहने का फैसला किया है.

मनमोहन सरकार की नीति पर विदेश मंत्रालय के किसी अधिकारी के बयान का कोई नोट सामने नहीं आया. विदेश मंत्रालय के कथित तौर पर अपने मिशंस को भेजे गए नोट की कोई फोटो मीडिया में नहीं आई.

स्टेप 4. सीएम की एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस

जब ये खबर उड़ी कि केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार ने पिछली मनमोहन सरकार की नीति पर चलते हुए UAE की मदद नकार दी है. तो त्रिवेंद्रम में फिर से सुगबुगाहट होने लगी. 22 अगस्त को विजयन ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा कि केरल के तमाम लोग UAE में काम करते हैं, तो UAE को बाकी विदेशी देशों की तरह न समझा जाए और मदद स्वीकार ली जाए.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में पी. विजयन का ये बयान

स्टेप 5- 700 करोड़ के गुब्बारे में लगी पिन, फिर से वाया इंटरव्यू

इंडियन एक्सप्रेस में अगले रोज यानी 23 अगस्त को UAE के राजदूत अहमद अल्बान्ना का इंटरव्यू छपा. अल्बन्ना ने कहा, ‘UAE ने अभी तक किसी आर्थिक मदद की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. अभी आकलन किया जा रहा है, लेकिन 700 करोड़ रुपए की मदद की बात फाइनल नहीं है और इसकी घोषणा नहीं की गई है. अभी तक इतना हुआ है कि UAE के उप-राष्ट्रपति, UAE के प्रधानमंत्री और दुबई के शासक ने नेशनल इमरजेंसी कमेटी बनाई है, जिसका लक्ष्य केरल के लिए फंड, राहत सामग्री, दवाई और अन्य चीज़ें इकट्ठा करना है. चूंकि वो भारत के मदद संबंधी नियम जानते हैं, तो अभी कमेटी फेडरल अथॉरिटीज़ के साथ कॉर्डिनेट कर रही है.’

तो UAE ने तो साफ कर दिया कि उसने 700 करोड़ रुपए की मदद का कोई ऑफर नहीं दिया है. लेकिन भारत में सोशल मीडिया पर इस पर खूब रायता फैला.

स्टेप 6- केरल और मोदी सरकार के मंत्री बोले कि UAE की मदद ले लो

केरल सरकार के वित्तमंत्री थॉमस इसाक ने कहा कि राहत कार्य के लिए विदेशी मदद स्वीकार करने में कोई नीतिगत दिक्कत नहीं है. केंद्रीय पर्यटन मंत्री केजे अल्फॉन्स कहा कि उन्होंने कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों से कहा कि केरल आपदा के बारे में UAE की मदद को अपवाद के तौर पर लिया जाए और मदद स्वीकार की जाए. अल्फॉन्स ने कहा कि सरकारी नीति ने कभी नहीं कहा कि हम विदेशी मदद नहीं लेगें. अगर ऐसी कोई नीति होती, तो 2016 के नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट पॉलिसी में साफ लिखी होती.

मोदी सरकार ने 2016 में नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट पॉलिसी बनाई थी और दावा किया था कि आपदा प्रबंधन को लेकर पहली बार किसी सरकार ने ऐसी कोई पॉलिसी बनाई है. ये पॉलिसी कागज़ पर है. इसमें भी यही लिखा है कि भारत किसी से मदद मांगेगा नहीं, कोई स्वेच्छा से पेशकश करेगा, तो उस पर विचार करेगा. नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि पहली बार भारत की किसी सरकार ने ऐसी पॉलिसी बनाई है.

Source - the lallantop






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