धारा 377 खत्म होने के बाद पहली बार कुंभ में किन्नर अखाड़ा बनेगा आकर्षण का केंद्र


अगले साल की शुरुआत में इलाहाबाद में कुंभ मेले का आयोजन होने वाला है। जिसमें लगभग 2500 ट्रांसजेंडर संन्यासी और संत किन्नर अखाड़ा के अंतर्गत हिस्सा लेंगे। इलाहाबाद के संगम (गंगा, यमुना और सरस्वती) पर किन्नर गांव बनाया जाएगा। यहां पर लोगों को धारा 377 रद्द करने के बाद की परिस्थितियों को लेकर जागरुक किया जाएगा। यह गांव धर्म और सांस्कृति का हब होगा। यह बातें आचार्य महामंडलेश्वर
6 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ब्रिटिश शासन के दौरान बनी धारा 377 को रद्द करते हुए कहा था कि दो व्यस्कों के बीच बने संबंध अपराध की श्रेणी में नहीं आते हैं। यह धारा, लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल और ट्रांसजेंडर समुदाय के शोषण का प्रमुख हथियार बन गई थी। अपने आदेश में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा था कि यह धारा उनके साथ होने वाले भेदभाव का कारण थी। त्रिपाठी ने कहा, 'किन्नर गांव में हर शाम को धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेंगे जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए लोक कलाकार प्रस्तुति देंगे।'





त्रिपाठी ने कहा, 'कुंभ मेला प्राधिकरण के साथ बातचीत जारी है। किन्नर गांव बनाने के लिए अधिकारी मेला क्षेत्र में जमीन देंगे। इस मामले पर हम इलाहाबाद के आयुक्त से मुलाकात करेंगे।' इस साल की शुरुआत में इलाहाबाद में आयोजित हुए वार्षिक माघ मेला में किन्नर अखाड़ा के संतों ने हिस्सा लिया था। वह अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से किन्नर अखाड़ा को मान्यता देने का इंतजार कर रहे हैं। अखाड़ा परिषद हिंदू संतों की सबसे बड़ी पीठ है। परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरी ने कहा, 'किन्नर अखाड़ा ट्रांसजेंडर्स के संतों का मठ है। वह 13 अखाड़े का हिस्सा नहीं हैं। इसलिए उन्हें मान्यता देने का कोई कारण ही नहीं है।'

Source - Amar Ujala 


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