जब जावेद अख़्तर को शबाना से प्यार हुआ तो उनकी पहली पत्नी की प्रतिक्रिया रुला देने वाली थी


भारत के जबरदस्त स्क्रिप्ट राइटर और गीतकार जावेद अख़्तर और अपने दौर में इंडिया के पैरेलल सिनेमा की रीढ़ रहीं जानदार एक्ट्रेस और एक्टिविस्ट शबाना आज़मी. अंदाज़ा लगा सकते हैं इन दोनों को अगर एक साथ ला दिया जाए तो क्या विस्फोट हो जाए. लेकिन उस विस्फोट के होने में अभी वक्त था.
क्योंकि जावेद की शादी हो चुकी थी. स्क्रिप्ट राइटर और एक्ट्रेस हनी ईरानी से.
हनी और जावेद तो राइटर जोड़ी सलीम-जावेद की लिखी फिल्म ‘सीता और गीता’ के सेट पर मिले थे. दोनों जवान थे, इंडेपेंडेंट थे. शादी के लिए ज़्यादा जोर नहीं लगाना पड़ा. फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद सब लोग पत्ते खेल रहे थे. गेम में जावेद की हालत पतली थी. हनी ने कहा ‘लाओ तुम्हारे पत्ते मैं निकालती हूं’. जावेद ने जवाब दिया ‘अगर पत्ते अच्छे निकले तो मैं तुमसे शादी कर लूंगा.’ पत्ते सही निकल गए. जावेद का गेम अब दोनों साइड सेट हो गया. खुद शर्मीले थे तो अपने जोड़ीदार सलीम ख़ान को हनी की मां से शादी की बात करने भेज दिया. सलीम ने जाकर लड़के का जो बखान किया वो आपने ‘शोले’ में कई बार देखा होगा. नहीं देखा तो यहां देख लीजिए:





मां ने सोचा 17 साल की उम्र में बहुत प्रेम होता है बांटने को. शादी कर लो. कुछ दिन में अपने आप होश ठिकाने आ जाएंगे. मतलब परमिशन मिल गई. जावेद उस वक्त फक्कड़ आदमी थे. न रहने का ठिकाना था न खाने का. लेकिन शादी हो गई. जैसे-तैसे रहने का जुगाड़ हो गया. कुछ दिनों में जावेद की फिल्म रिलीज़ हुई ‘जंज़ीर’. इसके बाद मामला सुधरने लगा. फिर बच्चे भी हो गए. कुछ और फिल्में आईं और सलीम-जावेद की जोड़ी फिल्म के पोस्टरों पर दिखने लगी. सब ठीक हो गया. ऐसा लगा. लेकिन नहीं, असली दिक्कत तो सबकुछ रास्ते पर आने की राह देख रही थी.

जावेद कमउम्र थे और ख़ासे सफल भी. सक्सेस सबसे हैंडल नहीं होती. इनसे भी नहीं हो रही थी. शराब भी बहुत पीने लगे थे. और साथ में प्यार की पींगे भी बढ़ रही थीं. जावेद लिखते थे. अपनी कविताएं सुनाने मशहूर शायर कैफ़ी आज़मी के घर जाया करते थे. कैफ़ी की एक बेटी थीं. अलग तरह की फिल्में और किरदार करने के लिए जानी जाती थीं. नाम था – शबाना.

शबाना से पहली दफ़ा जावेद उनके घर पर ही मिले. एक ही जैसे घरेलू माहौल में पले-बढ़े होने के कारण एक कंफर्ट लेवल तो था. लेकिन पहले थोड़ी अचकचाहट थी क्योंकि जावेद का रिलेशनशिप स्टेटस मैरिड था. टाइम के साथ चीज़ें काफी बदलने लगी थीं पर आगे नहीं बढ़ पा रही थीं. ऐसे में जावेद ने पहला कदमा बढ़ाया. एक पार्टी में जहां शबाना भी थीं, जावेद ने शबाना की फिल्म ‘स्पर्श’ का ज़िक्र छेड़ दिया और उनके परफॉरमेंस की तारीफ करने लगे. यहां से इनकी लव स्टोरी स्टार्ट हो गई.

जब ये बात शबाना के पेरेंट्स के कानों तक पहुंची तो उनकी भौहें तन गईं. उनकी मां शौकत तो इसके सख्त खिलाफ थीं. लेकिन पापा चिल्ड आउट थे, उन्हें बस जावेद के शादीशुदा होने से समस्या थी.

शबाना ने अपने पापा से पूछा ‘क्या वो मेरे लिए सही नहीं है?’ पापा ने कहा ‘वो गलत नहीं है. परिस्थितियां गलत हैं.’ शबाना ने पूछा ‘अगर वो परिस्थितियां बदल दें तो?’ जवाब आया ‘तब तो सब ठीक हो जाना चाहिए.’

शबाना और जावेद के रिलेशनशिप की खबर हनी को भी थी. पहले उन्होंने अवॉयड किया लेकिन फिर घर का माहौल बिगड़ने लगा. रोज़ लड़ाइयां होने लगी. हनी को जैसे ही ये एहसास हुआ कि उनका पति अब उनसे प्यार नहीं करता, उन्होंने कठिन और रुला देने वाली मनःस्थिति से जावेद को शबाना के पास जाने को कह दिया. संसार में किसी भी स्त्री या पुरुष के लिए अपने जीवनसाथी को यूं किसी दूसरे के पास जाने देना पहाड़ जैसा भयंकर भारी कष्ट है. जावेद बच्चों (ज़ोया और फरहान) से बात नहीं कर पा रहे थे. हनी ने ये मुसीबत भी अपने सिर ले ली और जावेद को पूरा फ्री कर दिया. शादी के 7 साल बाद हनी और जावेद अलग हो गए. लेकिन तलाक होने तक साल 1984 आ गया. हनी से तलाक लेने के बाद जावेद ने शबाना से 9 दिसंबर 1984 को शादी कर ली. उनके बच्चे अपनी मां के साथ रहते थे. किसी मेडिकल प्रॉब्लम की वजह से जावेद-शबाना ने कोई बच्चा नहीं पैदा किया. शबाना और जावेद के बच्चों के बीच अच्छी बॉन्डिंग है लेकिन दोनों पत्नियों के बीच भी सामान्य रिश्ते हैं.

Source - The LallanTop


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