दिव्यांग छात्रों की सुविधा के लिए बड़े कदम उठाने की तैयारी में सीबीएसई


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अपने दिशानिर्देशों में क्रांतिकारी सुधारों का प्रस्ताव रखा है। जिसमें भारतीय साइन लैंग्वेज यानि ब्रेल को एक विषय माना जाएगा। कंप्यूटर आधारित टेस्ट होंगे, हाजिरी में छूट होगी और अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग कठिनाई स्तर का विकल्प और विषयों के चयन में लचीलता प्रदान करना भी शामिल होगा।

मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस पॉलिसी ड्राफ्ट के बारे में बताया कि कुछ अहम सुझावों में विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए एक विषय के तौर पर इंडियन साइन लैंग्वेज शामिल है।

वहीं बोर्ड की परीक्षाओं में भाषा के एक या दो पेपर की जो अनिवार्य शर्त है, उसमें भी बच्चों को छूट दी जा सकती है। यानि बोर्ड द्वारा सुझाए गए तरीके से इसकी जगह बच्चों को इंडियन साइन लैंग्वेज का विकल्प दिया जा सकता है। ठीक इसी तरह ब्रेल को भी एक भाषा के ही एक विकल्प के तौर पर चुना जा सकता है।



अपने अकादमिक और परीक्षा संबंधी सुझावों के साथ ही बोर्ड ने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर और भी कई ऐसे विषयों को शुरू करने का सुझाव दिया है जो कौशल आधारित हों, इसके साथ ही विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान को और भी रुचिकर बनाने के लिए तीन कठिनाई स्तर का विकल्प मुहैया कराने को कहा है। पहला विकल्प ज्यादा कठिन होगा, दूसर कठिन होगा और तीसरा कम कठिन होगा। इससे छात्र अपनी शैक्षिक योग्यता के मुताबिक विकल्प का चुनाव कर पाएंगे।

बोर्ड ने इस पॉलिसी ड्राफ्ट पर टिप्पणी करने के लिए राज्यों को पत्र भी लिखा है। इस ड्राफ्ट में बोर्ड ने कहा है कि तकनीक के इस्तेमाल से पढ़ने और पढ़ाने के तरीके को आसान बनाया जाए ताकि परीक्षा देना सभी को लिए सुलभ हो सके।

इसके साथ ही हाजिरी में छूट उन बच्चों को दी जाएगी जो कैंसर जैसी बीमारी से पीड़ित हैं, या फिर दूर दराज के इलाकों में रहते हैं। इसके अलावा उन बच्चों को भी छूट दी जाएगी जो शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं और कक्षा तक पहुंच नहीं सकते। ऐसे बच्चों को स्कूल आने की जरूरत नहीं होगी। वह प्रत्येक सेशन के बाद ऑवलाइन टेस्ट दे सकेंगे। बच्चों को ऑनलाइन क्लास कंटेंट भी मिलेगा।

46 हितधारकों को किया आमंत्रित

विशेष जरूरत वाले बच्चों को लिए ये ड्राफ्ट इसलिए तैयार किया गया है ताकि उनके लिए एक जैसा सिस्टम बन सके। इसी के तहत सीबीएसई ने परामर्श के लिए 46 हितधारकों को आमंत्रित भी किया। जिसके बाद पॉलिसी का ड्राप्ट तैयार करने के लिए 4 जुलाई के सत्र में सभी ने हिस्सा लिया।

सत्र में हिस्सा लेने वाले हितधारकों में 20 एजुकेशन बोर्ड्स, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग, रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया, सामाजिक न्याय मंत्रालय, नेशनल बुक ट्रस्ट, मुख्य दिव्यांग आयुक्त का कार्यालय, अलिपुर की एसडीएम इरा सिंघल (2015 की आईएएस टॉपर जो खुद भी दिव्यांग हैं), नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डेफ और अमर ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट शामिल थे।

पॉलिसी ड्राफ्ट में ये भी कहा गया है कि सभी स्कूलों की बिल्डिंग इन बच्चों के अनुकूल होनी चाहिए। स्कूल का सही इन्फ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए, बिल्डिंग के हर हिस्से में रैम्प या लिफ्ट होनी चाहिए और सुलभ शौचालय का निर्माण भी किया जाना चाहिए।

Source - Amar Ujala 


Follow by Email