केबीसी से सुर्खियों में आई 'आप की रसोई', दविंदर के काम से अमिताभ भी हुए प्रभावित


सौ फीसद सच है कि ऊपरवाला सब देख रहा है..। नेक नीयत और हर नेक काम को मुकाम जरूर मिलता है। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) में इसी गुरुवार 6.40 लाख रुपये जीतने वाले इंजीनियर सरदार दविंदर सिंह चर्चा में हैं। 6.40 लाख रुपये जीतने के लिए कम, पांच रुपये लेकर कइयों का दिल जीतने के लिए ज्यादा। जी हां, सरदार जी ‘आप की रसोई’ चलाते हैं, जिसकी चर्चा अब देशभर में है। सिंह परिवार का छोटा सा नेक प्रयास दुनिया को इंसानियत का नेक संदेश देने में सफल रहा।

सिंह परिवार के जज्बे को सलाम

केबीसी में अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर बैठने से पहले भी दविंदर को दिल्ली से सटे हरियाणा के फरीदाबाद शहर में अनेक लोग जानते थे। लोगों को पता था कि सरदार जी भूखों को भरपेट खाना खिलाते हैं। गरीब-जरूरतमंद लोगों के लिए सरदार जी की रसोई, जिसे वे 'आप की रसोई' कहते हैं, अन्नपूर्णा की रसोई से कम नहीं। अपनी इनोवा कार में बड़े-बड़े बर्तनों में ताजा बना भोजन लिए शहर के किसी न किसी मोड़ पर लोगों को खाना खिलाते हुए दविंदर और उनके परिवार को सभी ने देखा था, लेकिन कौन बनेगा करोड़पति में पहुंचने के बाद पूरा देश सिंह परिवार के जज्बे को सलाम कर रहा है।



अमिताभ बच्चन भी हुए प्रभावित 

सिंह परिवार यह संदेश देने में सौ फीसद कामयाब हुआ है कि दविंदर जैसा एक व्यक्ति, सिंह परिवार जैसा एक परिवार भी अगर चाह ले तो दुनिया में कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे, कोई बच्चा भूख से न मरे। केबीसी में दविंदर सिंह ने जब आप की रसोई के बारे में जानकारी दी, तो अमिताभ बच्चन भी उनके इस नेक कार्य से बेहद प्रभावित हुए।

बचपन से यही सीख मिली

मुंबई से लौटने के बाद दैनिक जागरण से बातचीत में दविंदर सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा में बड़े-बुजुर्गो को ‘सेवा’ में रत देख उन्हें भी बचपन से यही सीख मिली। वर्ष 2006 में पुणे में इन्फोसिस में कार्यरत थे, तो इन्फोसिस की हिंजेवाणी फाउंडेशन के बैनर तले सरस्वती अनाथालय शिक्षण आश्रम जाते थे। वहां भी खाना लेकर जाते थे और वहां रह रहे बच्चों के साथ खेलते भी थे और पढ़ाते भी थे।

बच्चों की भूख से मौत ने झकझोर डाला

दविंदर ने बताया कि दिल्ली में दो बच्चों की भूख से मौत की खबर ने उन्हें झकझोर डाला। उन्हें लगा कि विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे भारत की राजधानी में यदि दो बच्चों की भूख से मौत हो जाती है, तो यह हर देशवासी के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने तभी तय किया कि अपनी ओर से जितना हो सकता है, उतना प्रयास वे अवश्य करेंगे।

भरपेट भोजन पांच रुपये में

बड़े भाई गुरविंदर सिंह, माता-पिता मनमोहन सिंह व सतनाम कौर, धर्मपत्नी नवनीत कौर और अपने दोस्त कर्ण को मन की बात बताई। तब सभी ने मिलकर ठान लिया कि सप्ताह में एक दिन उनका परिवार शहर की सड़कों पर निकल भूखों को भरपेट खाना अवश्य खिलाएगा। तब से परिवार के सभी सदस्य हर शनिवार को साथ मिलकर खाना बनाते हैं, गाड़ी में रखते हैं और ‘आप की रसोई- भरपेट भोजन पांच रुपये में’ लिखा एक बैनर लेकर शहर के किसी एक इलाके में पहुंच जाते हैं। दविंदर सिंह कहते हैं, पांच रुपये इसलिए कि कोई भी व्यक्ति भोजन लेने में झिझके ना। वैसे अगर कोई नहीं भी देता, तो उससे पैसे नहीं मांगे जाते हैं।

अब जुड़ना चाहते हैं बहुत सारे लोग

केबीसी के जरिये ‘आप की रसोई’ को प्रसिद्धि मिलने के बाद अब कई लोग इस नेक कार्य से जुड़ना चाहते हैं। दविंदर सिंह ने बताया कि उनके पास लगातार फोन आ रहे हैं। वाट्सएप ग्रुप बनाना पड़ा है, जिसमें लोग तेजी से जुड़ रहे हैं। दविंदर कहते हैं, उम्मीद है कि अब सप्ताह में एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन आप की रसोई भूखों को भोजन कराएगी। लोगों का आग्रह है कि इसे एनजीओ के रूप में व्यवस्थित तरीके से संचालित करूं, धन की कमी नहीं पड़ने दी जाएगी।

Source - Jagran 


Follow by Email