क्रेडिट कार्ड यूजर्स कृपया ध्यान दें: बैंक आपको इन चार्जेज के बारे में नहीं देते हैं जानकारी


नोटबंदी के बाद से कैशलेस ट्रांजेक्शन का चलन भारत में बढ़ा है। अब लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। बैंक भी लोगों को तरह तरह के ऑफर का लालच देकर अपने बैंक का क्रेडिट कार्ड लेने को कहते हैं। आपके पास भी अक्सर ऐसे ही फोन आते रहते होंगे। बैंक कर्मचारी आपसे यह कहकर की यह पूरी तरह से मुफ्त है आपसे क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करवा देते हैं। हालांकि बैंक कर्मचारी क्रेडिट कार्ड के पीछे छिपे शुल्क (चार्जेज) के बारे में आपको जानकारी नहीं देते हैं। हम अपनी इस खबर के माध्यम से आपको इन्हीं चार्जेज के बारे में जानकारी दे रहे हैं।


क्रेडिट कार्ड पर लगता है सालाना मेंटेनेंस चार्ज: बेशक बैंक कर्मचारी आपसे यह कहता हो कि कार्ड पूरी तरह से फ्री है लेकिन जब बैंक की ओर से क्रेडिट कार्ड जारी किया जाता है तो जॉइनिंग फीस और सालाना फीस से सिर्फ एक निश्चित समय के लिए ही छूट दी जाती है। इस अवधि के बाद आपको शुल्क का भुगतान करना पड़ता है।



ड्यू अमाउंट के भुगतान में देरी पर शुल्क: क्रेडिट कार्ड के माध्यम से जब आप कोई बड़ी खरीदारी करते हैं तो आप उस बड़ी राशि को ईएमआई के जरिए भी चुका सकते हैं। यह क्रेडिट कार्ड की सबसे बड़ी खासियत भी होती है और अभिशाप भी। क्योंकि अगर आप अपनी ड्यू डेट पर अपनी ईएमआई के भुगतान से चूक जाते हैं बैंक अतिरिक्त शुल्क लगाता है जिसे ‘लेट पेमेंट चार्ज’ कहा जाता है। ड्यू डेट के बाद भुगतान किया जाता है तब यह शुल्क लागू होता है।

ओवरड्राफ्ट चार्ज: जब कोई ग्राहक अपने क्रेडिट कार्ड पर निर्धारित मासिक क्रेडिट सीमा से अधिक खर्च करता है तो ओवरड्राफ्ट चार्ज देना होता है। इस शुल्क के बारे में बैंक कर्मचारी ग्राहकों को कभी जानकारी नहीं देते हैं।

जीएसटी का भी करना होता है भुगतान: क्रेडिट कार्ड के तहत किए जाने वाले सभी प्रकार के लेन देन जीएसटी के अंतर्गत आते हैं और आपको इसका भी भुगतान करना होता है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को 1 जुलाई 2017 को देशभर में लागू किया जा चुका है।

कार्ड पर मिलती है एटीएम से निकासी की सुविधा: जरुरत पड़ने पर आप अपने क्रेडिट कार्ड की मदद से एटीएम से पैसा भी निकाल सकते हैं। लेकिन आपको जानकारी होनी चाहिए कि ऐसी सेवाएं निशुल्क नहीं होती हैं। ऐसे लेन-देन के लिए अलग से शुल्क देना होता है। यह शुल्क आपकी निकासी का करीब 2.5 फीसद होता है।

Source - Jagran 


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