इन तीन हत्याओं से 90 के दशक में हिल गया था हिंदुस्तान, दुनिया भर में हुई थी चर्चा


देश के साथ-साथ पूरी दुनिया को हिला देने वाले जेसिका लाल, नैना साहनी और प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड के दोषियों को फिलहाल जेल में ही अपना जीवन गुजारना होगा। सजा समीक्षा बोर्ड ने इनकी सजा माफ करने की अपील को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया है। बोर्ड के ताजा फैसले के बाद मनु शर्मा (जेसिका लाल हत्याकांड), संतोष सिंह (प्रियदर्शिनी मट्टू) और सुशील शर्मा (नैना साहनी- तंदूर मर्डर केस) जेल में ही रहेंगे। वहीं, दिल्ली के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन की अध्यक्षता में बोर्ड ने 22 अपराधियों को सजा पूरी करने पर छोड़ने का फैसला लिया है। इसके अलावा बोर्ड ने 86 अपीलों को भी निरस्त कर दिया है। इसमें ये तीनों हाई प्रोफाइल केस भी शामिल हैं, जिसने 90 के दशक में देश के साथ पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था।
सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) ने बृहस्पतिवार को एक अहम बैठक में ये निर्णय लिया है। इस बैठक में 108 कैदियों के भविष्य पर फैसला लिया गया। यहां पर बता दें कि इसी साल 24 जून को हुई एसआरबी की बैठक में भी प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड के दोषी संतोष सिंह और जेसिका लाल हत्याकांड के दोषी मनु शर्मा के नाम की चर्चा हुई थी, लेकिन बोर्ड ने इन नामों पर विचार अगली सुनवाई तक के लिए टाल दिया था। बृहस्पतिवार को हुई बैठक में इन आरोपियों को फिलहाल जेल में रखने का निर्णय लिया गया है।

जेसिका लाल हत्याकांड

बता दें कि 29 अप्रैल, 1999 को पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा ने दक्षिणी दिल्ली के रेस्तरां में 34 वर्षीय मॉडल जेसिका लाल की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जेसिका द्वारा मनु को शराब परोसने से मना करना हत्या की वजह थी। जेसिका लाल हत्याकांड का मुकदमा सात साल तक चला और फरवरी 2006 में सभी आरोपी बरी कर दिए गए। आरोपियों के बरी होने पर सबरीना ने अपनी बहन के लिए इंसाफ मांगने के लिए और प्रयास शुरू कर दिए। मामला मीडिया में उछला और देशभर में आरोपियों को बरी किए जाने को लेकर आलोचना शुरू हो गई, इसके बाद जेसिका लाल मर्डर केस फिर से खोला गया।

दिल्ली पुलिस ने 13 मार्च 2006 को हाईकोर्ट में अपील दायर की। 18 दिसंबर, 2006 को हाईकोर्ट ने मनु शर्मा, विकास यादव और अमरदीप सिंह गिल उर्फ टोनी को दोषी करार दिया। मनु शर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। 2 फरवरी 2007 में उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। 19 अप्रैल 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने फिर से ने मनु शर्मा की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।

इसी साल अप्रैल महीने में जेसिका लाल की हत्या के 19 साल के बाद उनकी बहन सबरीना ने दोषी मनु शर्मा को माफ़ कर दिया था। तब सबरीना के मुताबिक, सिद्धार्थ वशिष्ठ उर्फ मनु शर्मा के तिहाड़ के ओपन जेल में शिफ्ट करने के फैसले पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। सबरीना का कहना है कि उन्होंने अपनी बहन की जान लेने वाले शख़्स को दिल से माफ़ कर दिया है और अगर उसे सज़ा में रियायत मिलती है तो उन्हें कोई परेशानी नहीं है।

प्रियदर्शनी मट्टू हत्याकांड

यहां पर बता दें कि दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की लॉ की छात्रा प्रियदर्शिनी मट्टू के हत्यारे का नाम इस बार उस सूची में जोड़ा गया था, जिनकी अच्छे व्यवहार के कारण जेल से समय पूर्व रिहाई हो सकती थी, पर ऐसा नहीं हुआ। बता दें कि 1996 में प्रियदर्शिनी मट्टू के दुष्कर्म और हत्या के मामले में आईपीएस ऑफिसर के बेटे संतोष सिंह को दोषी ठहराया गया था। इसी साल 24 जून में एसआरबी की बैठक के दौरान भी संतोष सिंह और मनु शर्मा का नाम इस लिस्ट में शामिल किया गया था, लेकिन बोर्ड ने इन नामों पर विचार करने के लिए सुनवाई को स्थगित कर दिया था। दोषी संतोष सिंह 2006 से जेल में बंद है। उसे दिल्ली हाईकोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2010 में हाईकोर्ट ने उसकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। गौरतलब है कि 1996 में संतोष सिंह आईपीएस अधिकारी जेपी सिंह के बेटा है। घटना के समय जेपी सिंह दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर थे। संतोष सिंह को थर्ड ईयर की लॉ स्टूडेंट प्रियदर्शिनी मट्टू के दुष्कर्म और हत्या के आरोप गिरफ्तार किया गया था फिर लंबी कानूनी जंग के बाद सजा हुई थी।

नैना साहनी हत्याकांड (तंदूर कांड)

देश के वीभत्स हत्याकांड में शुमार नैना साहनी हत्याकांड (तंदूर कांड) 90 के दशक में बहुत चर्चित हुआ था। इसकी एक वजह यह भी थी कि इसमें कांग्रेसी नेता का नाम भी जुड़ा था। नैना सहानी का हत्या में दोषी सुशील शर्मा जेल में बंद हैं। बताया जा रहा था कि इस बार उसके जेल से बाहर आने के आसार बन रहे थे, लेकिन समीक्षा बोर्ड ने मनु शर्मा और संतोष सिंह के साथ उसकी अपील को खारिज कर दिया है।

गौरतलब है कि 2 जुलाई, 1995 को कांग्रेस नेता सुशील शर्मा ने अवैध संबंधों के शक में पत्नी नैना साहनी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने नैना के शव को दिल्ली के एक होटेल में तंदूर में जलाने की कोशिश की थी। इस दौरान मामला खुल गया और पुलिस ने तंदूर से नैना का अधजला शव बरामद किया था। इसके बाद लंबी कानूनी लड़ाई में अदालत ने सुशील शर्मा को फांसी की सजा सुनाई फिर सुप्रीम कोर्ट ने सजा को उम्रकैद में बदल दिया।



जानें कौन-कौन हैं सजा समीक्षा बोर्ड में

दिल्ली के गृह मंत्री की अध्यक्षता वाली समिति में प्रमुख सचिव (गृह), प्रमुख सचिव (विधि), महानिदेशक (जेल), संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध), मुख्य परिवीक्षा अधिकारी और एक जिला सदस्य, सदस्य के तौर पर शामिल होते हैं। 

Source - Jagran 


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