ऐतिहासिक सबरीमाला फैसले के बाद मुस्लिम महिलाओं ने खटखटाया सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा


सर्वोच्च न्यायालय द्वारा केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश देने के निर्णय के बाद अब सुन्नी मस्जिदों में प्रवेश के लिए मुस्लिम महिलाएं सर्वोच्च न्यायालय से गुहार लगाने की तैयारी कर रही हैं। मस्लिम महिलाओं के एक संगठन निसा का कहना है कि मुस्लिम महिलाओं को सुन्नी मस्जिदों में प्रवेश की अनुमति नहीं है। उन्होंने अपील की कि महिलाओं को भी सुन्नी मस्जिदों में प्रवेश का हक मिलना चाहिए।

निसा की अध्यक्ष वीपी जुहरा ने कहा कि इस मामले में वह अगले सप्ताह सर्वोच्च न्यायालय के पास जाएंगी। उन्होंने कहा कि सुन्नी मस्जिदों में महिलाओं को नमाज पढ़ने के लिए अनुमति नहीं दी जाती है। सबरीमाला मामले का उदाहरण देते हुए जुहरा ने कहा कि अब जब सबरीमाला मंदिर में हिंदू महिलाओं को प्रवेश की अनुमति मिल गई है तो मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश से क्यों रोका जाता है। उन्होंने कहा 'हमने वकीलों से बात कर ली है, हम इस मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ले जाएंगे।'



मोहम्मद के समय में मस्जिद जाती थीं महिलाएं : जुहरा
जुहरा ने कहा, 'मैंने पढ़ा है कि मोहम्मद के समय में भी उन महिलाओं को भी मस्जिद में नमाज पढ़ने का अधिकार था जो मानसिक धर्म से गुजर रही होती थीं। जब मोहम्मद खुद इसके समर्थन में थे, तो भारत में महिलाओं पर ऐसे प्रतिबंध क्यों हैं?' बता दें कि 28 सितंबर को संविधान सभा ने निर्णय दिया था कि मासिद धर्म के दौरान महिलाओं पर प्रतिबंध उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

Source - Amar Ujala 


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