Post Office Offers Public Provident Fund Account: 10 Things To Know

Post Office Offers Public Provident Fund Account: 10 Things To Know

India Post or Department of Posts, the postal system of the country, provides a number of services. India Post, which has a network of over 1.5 lakh post offices across the country, offers several savings schemes with different interest rates. Interest rates on post office saving schemes move in line with the government's interest rates on small savings schemes, which are revised on a quarterly basis. One such savings scheme offered by post office is 15-year Public Provident Fund (PPF) Account, according to its official website, indiapost.gov.in.

Here are 10 key things to know about post office public provident fund (PPF) account:
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1. A post office PPF account can be opened by cash or cheque.
2. In case the account is opened by cheque, the date of realisation of cheque in government's account shall be date of opening of account. One can also open a joint account.
3. An investor needs a minimum of Rs. 100 to open the account but has to deposit Rs. 500 in a financial year.
4. The maximum limit in a financial year is Rs. 1,50,000, according to India Post. Deposits can be made in lump-sum or in 12 installments.
5. The public provident fund account offers an interest of 8 per cent per annum, which is compounded yearly, noted India Post.
6. Investment made under PPF account also qualifies for income tax benefits under Section 80C of the Income Tax Act, 1961. Interest earned is also tax-free, according to India Post.
7. A PPF subscriber cannot close the account before completing the 15-year period.
8. However, the tenure can be extended within one year of maturity for further five years and so on.
9. Premature withdrawal is permissible every year from seventh financial year from the year of opening account.
10. The account also offers loan facility from third financial year and nomination facility is available at the time of opening and also after opening of account.
Source - NDTV

पहली बार लोकसभा चुनाव में खाता भी नहीं खोल पाई लालू यादव की पार्टी

पहली बार लोकसभा चुनाव में खाता भी नहीं खोल पाई लालू यादव की पार्टी

बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आंधी ऐसी चली कि 6 पार्टियों का महागठबंधन हवा हो गया और एनडीए ने 40 में से 39 सीटें जीत कर इतिहास रच दिया. आरजेडी, कांग्रेस, रालोसपा, हम, वीआईपी और सीपीआईएम के गठबंधन को केवल एक सीट, किशनगंज से संतोष करना पड़ा. सन 1997 में आरजेडी की स्थापना के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब लालू प्रसाद यादव की पार्टी लोकसभा चुनाव में खाता भी नहीं खोल सकी.
मोदी मैजिक और नीतीश के काम का ऐसा घोल तैयार हुआ कि एनडीए की झोली में 40 में से 39 आ गिरीं. किशनगंज कांग्रेस ने जीती. प्रदेश में इस तरह के रिजल्ट आपातकाल विरोधी लहर और 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजी सहानूभूति की लहर में ही देखने को मिले थे. जिन सीटिंग सांसदों ने चुनाव लड़े उन्हें 2014 के मुकाबले कई गुना ज्यादा मतों से जीत मिली. इसकी वजह ये नहीं है कि जनता सांसद से खुश थी बल्कि इसके पीछे मोदी का मैजिक था. ये अंडर करंट था, जनता ने चुपचाप वोट दिया.
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एनडीए के घटकों में दिखा तालमेल
एनडीए के घटक दलों में जबरदस्त तालमेल देखने को मिला. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव के दौरान 171 जनसभाएं कीं, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी के साथ 8, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के साथ 23 और केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान के साथ 22 सभाएं भी शामिल हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इस जीत ने हमारी जिम्मेदारी और बढा दी है.
धरातल पर नहीं दिखी महागठबंधन की ताकत
महागठबंधन मजबूत नजर आ रहा था. लेकिन यह मजबूती धरातल पर नहीं नजर आई और तालमेल का अभाव दिखा. चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और आरजेडी के तेजस्वी यादव की संयुक्त रैली काफी देर से हुई. जाति के आधार पर वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश नाकाम रही. विपक्षी दल राष्ट्रवाद के मुद्दे की आलोचना करते रहे और उसका उल्टा एनडीए के उम्मीदवारों को होता गया.
महागठबंधन को खली लालू की कमी
महागठबंधन को इस चुनाव में आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की कमी खली. तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पूरे चुनाव प्रचार के दौरान कुशल नेतृत्व का घोर अभाव दिखा. 10 सीटों पर महागठबंधन के दलों में तालमेल की कमी और भितरघात साफ दिख रहा था. 2014 की मोदी लहर में भी आरजेडी 4 सीटें जीतने में सफल रही थी.
Source - Aaj Tak

मोदी के तूफान में उड़ गए कांग्रेस के 9 पूर्व मुख्यमंत्री, मिली करारी हार

मोदी के तूफान में उड़ गए कांग्रेस के 9 पूर्व मुख्यमंत्री, मिली करारी हार

मोदी लहर पर सवार भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव के नतीजों में प्रचंड बहुमत प्राप्त की है. वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सभी कोशिशें नाकाम साबित हुई हैं. लोकसभा चुनाव के नतीजों में कांग्रेस की हालत ऐसी है कि 9 पूर्व मुख्यमंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा है. इनमें पहला नाम है मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का.
1. दिग्विजय की हार
कांग्रेस के कदावर नेता दिग्विजय सिंह ने मालेगांव बम विस्फोट की आरोपी और भाजपा की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह के खिलाफ ताल ठोका था. इस जंग में प्रज्ञा ने सिंह को 3,64,822 मतों के भारी अंतर से पराजित कर प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में जीत दर्ज की है. दिग्विजय सिंह को 35 फीसदी वोट मिले. वहीं, प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 61 फीसदी वोट मिले.
पूरे देश की निगाहें इस चुनाव पर लगी हुई थी. निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा के अनुसार भाजपा उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर को कुल 8,66,482 वोट मिले जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के दिग्विजय सिंह को 5,01,660 मत मिले. भोपाल लोकसभा सीट पर नोटा सहित कुल 31 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे और 5,430 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाना पसंद किया.
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2. मनोज तिवारी की बड़ी जीत
उत्तर पूर्व दिल्ली सीट पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने अपनी निकटतम प्रत्याशी और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को करीब 3 लाख 66 हजार वोटों के अंतर से परास्त किया. दिल्ली में कांग्रेस (22.5 प्रतिशत) और आप (18.1 प्रतिशत) के सम्मिलित वोट की तुलना में भाजपा ने 56 प्रतिशत से ज्यादा मत हासिल किए. भाजपा ने 2014 में 46.4 प्रतिशत वोट हासिल किए थे.
3. हुड्डा को मिली हार
भाजपा ने हरियाणा में कांग्रेस का सूपड़ा लगभग साफ कर दिया है. भगवा पार्टी ने राज्य में 10 सीटों में 8 सीटें जीत ली है, वहीं एक सीट आईएनएलडी के खाते में गई है. बाकी बची एक सीट पर कांग्रेस आगे है. मोदी लहर में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी अपनी सीट नहीं बचा पाए. सोनीपत में उन्हें भाजपा के निवर्तमान सांसद रमेश चंद्र कौशिक ने 1,64,864 मतों के अंतर से हारा दिया. 2014 में भाजपा ने 8 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसमें से 7 पर जीत हासिल की थी. आईएनएलडी ने 2 सीटें और कांग्रेस 1 सीट पर विजयी रही थी.
4. उत्तारखंड में रावत की हार
भाजपा ने उत्तराखंड में 2014 आम चुनावों के अपने शानदार प्रदर्शन को दोहराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के रथ पर सवार होकर पांचों सीटों पर इस बार और अधिक मतों के अंतर से अपने चिर प्रतिद्वंदी कांग्रेस को मात दे दी. सभी सीटों पर कब्जा बरकरार रखने के साथ ही भाजपा ऐसा करने वाली प्रदेश की एकमात्र राजनीतिक पार्टी बन गई है. प्रदेश के इतिहास में आज तक कोई भी राजनीतिक पार्टी लगातार दो आम चुनावों में जीत नहीं दोहरा पाई है. उधमसिंह नगर-नैनीताल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भटट अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को 3,39,096 मतों से हराया. भटट को 772195 मत मिले जबकि रावत को 433099 मतों से संतोष करना पड़ा.
5. अशोक चौहाण को भी मिली निराशा
महाराष्ट्र में भी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. यहां के नांदेड लोकसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अशोक चव्हाण को भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रताप चिकलीकर ने 40,148 मतों के अंतर से हरा दिया है. सत्ताधारी गठबंधन ने 2014 के चुनाव में 42 सीटें जीती थीं. कांग्रेस ने 2014 के आम चुनाव में 2 सीटें जीती थीं.
6. शिंदे ने भी गंवाया सीट
महाराष्ट्र की सोलापुर सीट पर कांग्रेस के एक नेता और पूर्व मुख्यमंत्री को हार का सामना करना पड़ा. इस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भाजपा नेता जयसिद्धेश्वर स्वामी के खिलाफ ताल ठोका था लेकिन उन्हें 1,58,608 मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा.


7. मुकुल संगमा की भी हार
मेघालय की तुरा सीट से नेशनल पीपल्स पार्टी की अगाथा संगमा ने कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा को 64030 वोटों के अंतर से हरा दिया है. इस सीट से कुल 3 उम्मीदवार मैदान में थे. कॉनरॉड के. संगमा के मुख्यमंत्री बनने के बाद नेशनल पीपुल्स पार्टी की ओर से अगाथा के संगमा मैदान में थे, जबकि कांग्रेस की ओर से डॉक्टर मुकुल संगमा और भारतीय जनता पार्टी की ओर से रिकमैन गैरी मोमीन अपनी किस्मत आजमा रहे थे.
8. नाबाम तुकी
चुनाव आयोग के मुताबिक अरुणाचल पश्चिम सीट से केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा उम्मीदवार किरण रिजीजू, कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नाबाम तुकी से 1,39,854 वोटों से आगे चल रहे हैं. साल 2014 में रिजीजू ने कांग्रेस के टी संजय को 41738 वोटों से शिकस्त दी थी.
9. वीरप्पा मोइली भी हारे
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एम वीरप्पा मोइली को भाजपा उम्मीदवार बी एन बाचे गौड़ा ने चिकबल्लापुर सीट पर 1,82,110 मतों के अंतर से हरा दिया है. गौड़ा को 7,45,912 जबकि मोइली को 5,63,802 वोट मिले. पूर्व केंद्रीय मंत्री मोइली राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जद(से) गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार थे. उल्लेखनीय है कि गौड़ा 2014 के लोकसभा चुनाव में मोइली से करीब 9,500 मतों के अंतर से हारे थे. मोइली 1992 से 1994 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे थे.
वह 2009 के लोकसभा चुनाव में चिकबल्लापुर से निर्वाचित हुए थे. पिछले आम चुनाव में वोक्कालिगा वोटों के बंटने को गौड़ा की हार का कारण बताया गया था. तटीय क्षेत्र से आने वाले मोइली इस चुनाव में बहुत हद तक जद(एस) पर निर्भर थे, जिसके पास वोक्कालिगा समुदाय का मजबूत समर्थन है. हालांकि, पुराने मैसूर के मांड्या, मैसूर और हासन जैसे क्षेत्रों में दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच रहा मतभेद मोइली की हार का कारण रहा होगा.
Source - Aaj Tak

ओडिशा की पुरी लोकसभा सीट से BJP कैंडिडेट संबित पात्रा 700 वोटों से आगे

ओडिशा की पुरी लोकसभा सीट से BJP कैंडिडेट संबित पात्रा 700 वोटों से आगे

ओडिशा सहित देश के सभी राज्यों में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव ( Election Result 2019) के लिए वोटों गिनती शुरू हो चुकी है. रुझानों में बीजेपी को ऐतिहासिक सफलता मिलती दिख रही है. बीजेपी यहां 7 सीटों पर बढ़त बनाई हुई है. नवीन पटनायक (Naveen Patnaik) की पार्टी बीजेपी यहां 14 सीटों पर आगे चल रही है. वहीं, पुरी लोकसभा सीट से BJP कैंडिडेट संबित पात्रा 700 वोटों से आगे चल रहे हैं. अस्का लोकसभा सीट पर बीजद प्रत्याशी प्रमिला बिसोयी भाजपा उम्मीदवार अनिता सुभदर्शिनी से 852 मतों से आगे हैं. बारगढ़ लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में बीजद उम्मीदवार प्रसन्ना आचार्य भाजपा के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सुरेश पुजारी से 358 मतों से बढ़त बनाए हुए हैं. बालंगीर लोकसभा सीट से भाजपा की संगीता कुमारी सिंह देव बीजद उम्मीदवार नारायण सिंह देव से 727 मतों से आगे हैं. ढेंकनाल में बीजद उम्मीदवार महेश साहू भाजपा उम्मीदवार रुद्र नारायण पाणि से 1,349 मतों से, जाजपुर में बीजद उम्मीदवार शर्मिष्ठा सेठी भाजपा उम्मीदवार अमिय कांत मलिक से 513 मतों से, कालाहांडी में भाजपा के बसंत कुमार पांडा बीजद के पुष्पेंद्र सिंह देव से 195 वोटों से, कंधमाल में बीजद उम्मीदवार अच्युतानंद सामंत भाजपा के खराबेला स्वेन से 756 मतों से, क्योंझर में बीजद उम्मीदवार चांदरानी मुर्मू भाजपा उम्मीदवार अनंत नायक से 329 मतों से और कोरापुट में बीजद उम्मीदवार कौशल्या हिकाका कांग्रेस उम्मीदवार सप्तगिरि शंकर उलाका से 226 मतों से आगे हैं. नबरंगपुर में बीजद के रमेश माझी भाजपा के बलभद्र माझी से 114 और संबलपुर में बीजद उम्मीदवार नलिनी कांता प्रधान भाजपा उम्मीदवार नीतेश गंग देव से 677 मतों से आगे हैं.
नवीन पटनायक (Naveen Patnaik) की पार्टी बीजू जनता दल (BJD) और बीजेपी (BJP) के बीच जबरदस्त टक्कर दिख रही है. बता दें कि 2014 को लोकसभा चुनाव में बीजेडी ने 20 सीटें और बीजेपी ने 1 सीट पर जीत हासिल की थी. मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) एस कुमार ने बताया था कि मतों की गिनती करीब 25,000 टेबिलों पर की जा रही है. उन्होंने बताया था कि सभी मतगणना हॉल में विधानसभा और लोकसभा सीटों के लिए कम से कम सात टेबिल होंगी और सभी टेबिल पर मतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष गिनती सुनिश्चित करने के लिए एक पर्यवेक्षक, एक मतगणना सहायक और एक माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किया जाएगा.
- अस्का लोकसभा सीट पर बीजद प्रत्याशी प्रमिला बिसोयी भाजपा उम्मीदवार अनिता सुभदर्शिनी से 852 मतों से आगे हैं. बारगढ़ लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में बीजद उम्मीदवार प्रसन्ना आचार्य भाजपा के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सुरेश पुजारी से 358 मतों से बढ़त बनाए हुए हैं.
- बालंगीर लोकसभा सीट से भाजपा की संगीता कुमारी सिंह देव बीजद उम्मीदवार नारायण सिंह देव से 727 मतों से आगे हैं.
- ढेंकनाल में बीजद उम्मीदवार महेश साहू भाजपा उम्मीदवार रुद्र नारायण पाणि से 1,349 मतों से, जाजपुर में बीजद उम्मीदवार शर्मिष्ठा सेठी भाजपा उम्मीदवार अमिय कांत मलिक से 513 मतों से, कालाहांडी में भाजपा के बसंत कुमार पांडा बीजद के पुष्पेंद्र सिंह देव से 195 वोटों से, कंधमाल में बीजद उम्मीदवार अच्युतानंद सामंत भाजपा के खराबेला स्वेन से 756 मतों से, क्योंझर में बीजद उम्मीदवार चांदरानी मुर्मू भाजपा उम्मीदवार अनंत नायक से 329 मतों से और कोरापुट में बीजद उम्मीदवार कौशल्या हिकाका कांग्रेस उम्मीदवार सप्तगिरि शंकर उलाका से 226 मतों से आगे हैं.
- नबरंगपुर में बीजद के रमेश माझी भाजपा के बलभद्र माझी से 114 और संबलपुर में बीजद उम्मीदवार नलिनी कांता प्रधान भाजपा उम्मीदवार नीतेश गंग देव से 677 मतों से आगे हैं.
- नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (BJD) ने अब 11 सीटों पर और बीजेपी 10 सीटों पर आगे चल रही है.
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सीटों पर बढ़त बना ली है, जबकि बीजेपी 5 सीट पर आगे चल रही है.
- ओडिशा में मोदी मैजिक चलता दिख रहा है. यहां बीजेपी 12 सीटों पर आगे चल रही है. जबकि, नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी 8 सीटों पर बढ़त बनाई हुई है.
- पुरी लोकसभा सीट से बीजेपी कैंडिडेट संबित पात्रा पीछे चल रहे हैं.
- नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी पर शुरुआती रुझानों में बीजेपी ने बढ़त बना ली है. बीजेपी यहां 12 सीटों पर जबकि बीजेडी 8 सीट पर आगे चल रही है.
- ओडिशा के शुरुआती रुझानों में बीजेपी 2 सीटों पर आगे चल रही है.
- शुरुआती रुझानों में बीजेपी और नवीन पटनायक के बीच कांटे की टक्कर हो रही है.
- ओडिशा में वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है. पोस्टल बैलट और ईवीएम की गिनती साथ साथ हो रही है.
मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) एस कुमार ने बताया कि आज सुबह आठ बजे मतों की गिनती शुरू होगी और यह गिनती करीब 25,000 टेबिलों पर की जाएगी.
- उन्होंने बताया कि सभी मतगणना हॉल में विधानसभा और लोकसभा सीटों के लिए कम से कम सात टेबिल होंगी और सभी टेबिल पर मतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष गिनती सुनिश्चित करने के लिए एक पर्यवेक्षक, एक मतगणना सहायक और एक माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किया जाएगा.
- ओडिशा में 63 केन्द्रों पर की जाएगी मतों की गिनती.
- राज्य में लोकसभा की 21 और विधानसभा की 146 सीटों के लिए11, 18, 23 और 29 अप्रैल को मतदान हुआ था.

ओडिशा (Odisha) में लोकसभा चुनाव की लड़ाई नवीन पटनायक (Naveen Patnaik) बनाम पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) है. बीते दो दशक से राज्य की सत्ता में काबिज नवीन पटनायक ने एग्जिट पोल के मुताबिक इस बार भी बीजेपी को कड़ी चुनौती दी है. जानकारों का मानना है कि ओडिशा के मतदाताओं ने केंद्र में नरेंद्र मोदी और राज्य में नवीन पटनायक के लिए वोट किया है. ओडिशा में इस बार लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ ही हुए हैं. बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान ओडिशा में फेनी तूफान आया था, जिसके चलते 11 जिलों में आचार संहिता को हटा दिया था. ओडिशा में बीजू जनता दल (BJD) का पिछले दो दशक से शासन है. बीजेपी भी पिछले कई सालों से यहां पांव जमाने की कोशिश कर रही है. ओडिशा में 21 लोकसभा सीटें हैं और 2014 के आम चुनाव में सत्ताधारी दल बीजू जनता दल (BJD) ने 20 सीटें जीती थीं. जबकि बीजेपी यहां एक सीट ही जीतने में कामयाब हो पाई थी. बीजेपी यहां सुंदरगढ़ लोकसभा सीट से जीत हासिल कर सकी थी.
ओडिशा में सात चरण में संपन्न हुए चुनाव
इस बार 11 अप्रैल से 19 मई के बीच 7 चरणों में लोकसभा चुनाव हुआ. ओडिशा में पहले चरण में 11 अप्रैल को 20 राज्यों की 91 सीटों पर मतदान हुआ, वहीं, दूसरे चरण में 18 अप्रैल को 13 राज्यों की 97 सीटों पर वोट डाले गए. तीसरे चरण में 23 अप्रैल को 14 राज्यों की 115 सीटों, चौथे चरण 29 अप्रैल को 9 राज्यों की 71 सीटों, पांचवें चरण में 6 मई को 7 राज्यों की 51 सीटों, छठे चरण में 12 मई को 7 राज्यों की 59 सीटों और सातवें व आखिरी चरण में 19 मई को 59 सीटों पर वोटिंग हुई थी.
Source - NDTV

बंगाल में भी बाहुबली बनी BJP, दीदी के दुर्ग में सेंध

बंगाल में भी बाहुबली बनी BJP, दीदी के दुर्ग में सेंध

(पश्चिम बंगाल लोकसभा चुनाव परिणाम): ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल में कुछ ही देर में चुनाव परिणाम आने वाले हैं. बीजेपी ने इस बार बड़ी जीत के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है, तो वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपने गढ़ में सेंध लगने से रोकने को खुलकर मोदी-शाह को जमकर चुनौती दी. आजतक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक, बीजेपी पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 19 से 23 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है. वहीं राज्य में सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को महज 19 से 22 सीटों से संतोष करना पड़ सकता है. कांग्रेस को बंगाल में सिर्फ एक सीट मिलने का अनुमान है. अब देखना होगा कि जीत किसके साथ जाती है.
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Source - Aaj Tak

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