5 दिन बाद बंद हो जाएगी PNB की सर्विस, करोड़ों ग्राहकों पर होगा असर

5 दिन बाद बंद हो जाएगी PNB की सर्विस, करोड़ों ग्राहकों पर होगा असर

अगर आप पंजाब नेशनल बैंक के ग्राहक हैं तो आपके लिए एक जरूरी खबर है. दरअसल, पंजाब नेशनल बैंक ने एक ऐसी सर्विस बंद करने का ऐलान किया है जिसका असर करोड़ों ग्राहकों पर पड़ने की आशंका है. आइए जानते हैं कि आखिर क्‍या है वो सर्विस...

दरअसल, पंजाब नेशनल बैंक ने 30 अप्रैल से अपनी एक खास सर्विस PNB Kitty (पीएनबी किटी ) को बंद करने की बात कही है. पीएनबी किटी एक डिजिटल वॉलेट है. इसके जरिए पंजाब नेशनल बैंक के ग्राहक ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन करते हैं.
इसके अलावा क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेटबैंकिंग की जगह पीएनबी किटी से पेमेंट की जा सकती है. आसान भाषा में समझें तो यह पेटीएम या मोबिक्‍विक की तरह का वॉलेट है. इसमें नेटबैंकिंग का पासवर्ड या कार्ड की जानकारी आदि सुरक्षित रहती है.
क्‍या कहा बैंक ने
पंजाब नेशनल बैंक ने अपने ग्राहकों को बताया है कि वह पीएनबी किटी में पड़े पैसे 30 अप्रैल तक या तो खर्च कर लें या फिर IMPS के जरिए अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर लें. इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपने बैंक की बात नहीं मानी तो 30 अप्रैल के बाद वॉलेट में पड़ा आपका पैसा फंस सकता है.
पीएनबी किटी वॉलेट के जरिए मोबाइल नंबर के जरिए वॉलेट टू वॉलेट ट्रांसफर के अलावा बैंक अकाउंट में IMPS के जरिए ट्रांसफर की सुविधा दी जाती है.
इसके अलावा मोबाइल/डीटीएच टीवी रिचार्ज, ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन और यूटिलिटी बिल पेमेंट ट्रांजेक्शन भी किया जा सकता है. इसी के साथ क्यूआर कोड के जरिए भी पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है.
बैंक की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक अगर वॉलेट में बैलेंस जीरो है तो अकाउंट बंद हो जाएगा. अगर वॉलेट में बैलेंस बचा है तो यूजर उसे खर्च कर लें या किसी दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर कर लें. बैंक की इस सुविधा के बारे में विस्‍तार से जानकारी के लिए https://www.pnbindia.in/PNB-Kitty.html लिंक पर क्‍लिक करें.
Source - Aaj Tak

पुस्तक दिवस कौन मनाता है?

पुस्तक दिवस कौन मनाता है?

जैसे-जैसे हम किताबों से दूर होते जा रहे हैं, किताबों को लेकर हम ज्यादा प्रेम जताने लगे हैं. जो लोग कहते हैं कि उन्हें किताबें पढ़ना अच्छा लगता है, उनमें वाकई दस फ़ीसदी लोग ही वाकई नियमित तौर पर किताबें पढ़ते हैं. बाकी किताबों के बारे में पढ़ लेते हैं.
हिंदी में स्थिति और बुरी है. पुस्तक प्रेमी होने का दावा करने वाले किसी शख़्स से पूछिए कि उसने आखिरी किताब कौन सी पढ़ी है तो वह कुछ लड़खड़ाते हुए प्रेमचंद का नाम ले लेगा और किताब का नाम पूछने पर उनकी किसी कहानी का ज़िक्र कर देगा. जाहिर है, यह वह जमात है जो किताब पढ़ती नहीं है, पुस्तक दिवस भले मना ले.
मैंने कई जागरूक दिखने वाले लोगों, पत्रकारों, ऐंकरों को देखा है- वे कुछ मशहूर लेखकों के नाम जानते हैं, लेकिन उनके लेखन या उनकी किताबों के बारे में नहीं जानते. पुस्तक मेलों में, साहित्य समारोहों में वास्तविक लेखक नहीं होते, अक्सर वे मशहूर हस्तियां होती हैं जो किसी और वजह से लोकप्रिय हो गई हैं और इस लोकप्रियता का फायदा उठाते हुए किताबें लिख ले रही हैं. देश में बढ़ते साहित्य समारोहों के केंद्र में अक्सर ऐसी ही फिल्मी हस्तियां होती हैं, टीवी ऐंकर होते हैं और नेता-क्रिकेटर होते हैं. लेखक कहीं हाशिए पर होता है जिसका काम बस इन समारोहों को वैधता प्रदान करना होता है.
वैसे यह सच है कि किताबें हमेशा बहुत ज़्यादा नहीं पढ़ी गईं. कम से कम सौ साल का यही सच है. बीसवीं सदी साहित्य की नहीं, सिनेमा की सदी रही है. फिल्मों के मामूली से मामूली कलाकार किसी भी लेखक से ज़्यादा मशहूर रहे. फिल्मी दुनिया ने जिन किताबों को हाथ लगाया, वे मशहूर हो गईं. शरतचंद का बहुत औसत क़िस्म का उपन्यास 'देवदास' फिल्म बनने के बाद क्लासिक हो गया. 'शेष प्रश्न', 'पथ के दावेदार' या 'चरित्रहीन' जैसे उनके कहीं बेहतर उपन्यासों को कम लोग याद करते हैं. 'तमस' और 'चंद्रकांता' जैसी कृतियों को तब वास्तविक शोहरत मिली, जब उन पर सीरियल बने.
किताबों की दुनिया मूलतः स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक सीमित रही. वे सदियों तक शिक्षा और ज्ञान का इकलौता माध्यम बनी रहीं. इसलिए किताबों को कुछ अतिरिक्त श्रद्धा से देखा गया. किताबें पढ़ने वाले बुद्धिमान माने जाते रहे, किताबें लिखने वाले और ज़्यादा विद्वान.
लेकिन शिक्षा-संस्थानों के दायरे के बाहर और अकादमियों गतिविधियों से इतर श्रेष्ठ साहित्य कम पढा जाता रहा. वे किताबें ज्यादा चलीं जो रहस्य-रोमांच, अपराध और सेक्स बेचती रहीं. यह अनायास नहीं है कि दुनिया के कुछ सबसे मशहूर लेखक जासूसी उपन्यासों के लेखक रहे हैं. बेशक, उनमें से कई बहुत श्रेष्ठ लेखक रहे हैं, लेकिन वे उन महानतम लेखकों की सूची में नहीं आते जो कम पढ़े गए, लेकिन जिन्होंने ज़्यादा मूल्यवान दिया.
फिर भी किताबों के हम पर बहुत एहसान हैं. सदियों तक उन्होंने सभ्यताओं को सींचा है. हमारे भीतर की मनुष्यता को बचाए रखने में उनकी भूमिका बहुत बड़ी है. हमारी पीढ़ी तक ऐसे लाखों नहीं, करोड़ों लोग होंगे जिन्हें कोर्स की किताबों से अलग बाकी किताबें छुप-छुप कर, समय निकाल कर पढ़ने की याद होगी. तब हम पुस्तक दिवस नहीं मनाते थे, किताबों के बारे में रोमानी ढंग से नहीं सोचते थे.
दूसरी बात यह कि किताबें पढ़ने के बारे में सोचना जितना सुंदर लगता है, किताबें पढ़ना हमेशा उतना सुंदर काम नहीं हुआ करता. वह बहुत धीरज की मांग करता है. उसमें दिमाग पर ज़ोर लगाना पड़ता है. मनोरंजक किताबें आसानी से पढ़ ली जाती हैं, लेकिन जो किताबें कुछ गहराई की मांग करती हैं, जो हमारे अंतर्द्वंद्वों का सुराग देती हैं, जो हमें ज्ञान देती हैं, उन्हें पढ़ते हुए कई बार बोरियत भी होती है. दुनिया के कई महानतम उपन्यास पहली श्रेणी के पठनीय उपन्यास नहीं हैं. उनकी पठनीयता कुछ शर्तों की मांग करती है. बेशक, वे कम पढ़ी जाएं, लेकिन वे सदियों तक टिकी रहती हैं.
फिर किताबें सिर्फ़ अच्छी बातें ही नहीं, बहुत सारी बुरी बातें भी सिखाती हैं. किताबें दरअसल ज्ञान का स्रोत हैं. वह ज्ञान हर तरह का हो सकता है. किताबें अगर आपको मनुष्य बना सकती हैं तो कभी-कभी अपनी मनुष्यता छोड़ने पर बाध्य भी कर सकती हैं. किताबों के ज़रिए हमने सांप्रदायिकता का प्रचार भी देखा है और झूठ का भी.
बहरहाल, हमारे समय में किताबों के संकट कुछ और हैं. ज्ञान पर छपे हुए शब्दों की, किताबों की इजारेदारी नए माध्यमों ने तोड़ दी है. शिक्षण-संस्थानों में शायद सदियों बाद ऐसा हो रहा है कि किताबों की अहमियत कम हो रही है और कंप्यूटर या ऑनलाइन अध्ययन के विकल्प बढ़ रहे हैं. बेशक, वे किताबों पर ही निर्भर हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह दिख रहा है कि युवा पीढ़ी पढ़ने में कम, वीडियो देखने में ज़्यादा दिलचस्पी लेती है. किताबों की जगह भी धीरे-धीरे ई बुक लेते जा रहे हैं. किंडल की बढ़ती लोकप्रियता इस तथ्य की ओर इशारा कर रही है.
बेशक, किताबें- और साहित्यिक किताबें भी- अब तक बहुत बड़ी तादाद में छप और बिक रही हैं. यह देख कर हैरानी होती है कि हिंदी में भी हर रोज़ कवियों-कथाकारों और लेखकों की नई पौध अपनी नई किताबों के साथ आ रही है. दरअसल हमारी पूरी सभ्यता में किताबों की जड़ें इतने गहरे धंसी हुई हैं कि उन्हें आसानी से निकालना तो दूर, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. कोई ऐसा दिन आएगा, जब हम किसी पुस्तकविहीन समाज का हिस्सा होंगे- यह सोचना कम से कम हमारी पीढ़ी के लिए मुश्किल है.
लेकिन पुस्तक दिवस मना कर और पुस्तकों के प्रति नकली प्रेम जता कर हम किताबों को नहीं बचा पाएंगे. किताबें तभी बचेंगी जब हमारे भीतर पढ़ने का अभ्यास बचेगा. पढ़ने का अभ्यास तब बचेगा जब हमें अपने इतिहास-भूगोल को लेकर हमारी जिज्ञासा बची रहेगी. यहीं से किताब की अहमियत खुलती है. किताबें हमारा बौद्धिक पर्यावरण बनाती हैं. हमारे बचे रहने के लिए यह पर्यावरण ज़रूरी है. किताब पढ़िए, ख़ूब पढ़िए, बस यह न कहिए कि किताबों से आपको प्रेम है.
Source - NDTV

मोटापा कैसे घटाएं? 3 Diet Tips जिनसे कम होगा वजन, घटेगा बैली फैट

मोटापा कैसे घटाएं? 3 Diet Tips जिनसे कम होगा वजन, घटेगा बैली फैट

गर आप वजन कम (Weight Loss Tips in Hindi) करने की कोशिश कर रहे हैं, तो यकीनन आपके आसपास से ही आपको बहुत सी सलाह मिल जाती होंगी. अक्सर हम अपने बढ़े वजन से परेशान रहते हैं. इसकी वजह 100 में से 99 बार यह होती है कि आपको लोग फैटी या मोटा (Lose Weight And Burn Belly Fat) कहते हैं. अक्सर यह मोटापा पेट पर ही उभरता है और बैली फैट (Belly Fat) की शक्ल ले लेता है. तो आप अपना मन बताते हैं वजन कम करने का. और शुरू करते हैं सेहत से जुड़ी यह यात्रा. लेकिन अगर आप सोचते हैं कि केवल कसरत करने से और कुछ भी खाने से आपका वजन घट (Weight Loss) जाएगा तो आप गलत हैं. जल्द और सकारात्मक नतीजों के लिए आपको अपनी डाइट और एक्सरसाइज में तालमेल बिठाना होगा. क्योंकि जहां एकतरफ एक्सरसाइज आपका स्टेमिना, इम्यूनिटि और मेटाबॉलिजम को मजबूत करने में आपकी सहायता करता है वहीं दूसरी ऐसा भोजन करना जिसमें शुगर और कार्ब्स की मात्रा अधिक हो केवल थकावट और आलस्य को बढ़ावा देता है. नतीजतन आपका वजन घटने की बजाय बढ़ता है.
ये हैं 5 ऐसे हेल्दी फूड जो नहीं घटा सकते आपका वजन
यहां हैं तीन ऐसी असरकारी डाइट टिप्स जो वजन कम करने में करेंगी आपकी मदद (Ultimate Diet Tips To Lose Weight And Burn Belly Fat):
1. वजन कम करने के लिए खाएं प्रोटीन (Include Proteins in Your Diet)
वजन कम करना है तो प्रोटीन डाइट लेनी होगी, यह बात अब तकरीबन हर किसी को पता है. लेकिन प्रोटीन में क्या खाना है यह कितने लोगों को पता है? असल में हम वजन कम करने के लिए प्रोटीन (Protein and weight loss) के रोल को समझना बहुत जरूरी है. एक्सपर्ट की मानें तो फैटी की जगह लीन प्रोटीन (lean proteins) को अपने खाने में जोड़ने से ही आप वेट लॉस की तरफ पहला स्वस्थ कदम उठा सकते हैं. कई बार ज्यादा प्रोटीन रिच (protein-rich food) और फैट से भरपूर आहार लेने से आप वजन कम करने की जगह उसे बढ़ा भी सकते हैं. इसलिए यह जानना जरूरी है कि आपको पता हो कि कौन सा प्रोटीन आपको खाना है अपना मोटिव पूरा करने के लिए.
2. वजन कम करने के लिए कम खाएं चीनी (Cut back on sugar and starches to Lose Weight)
जी हां, वजन कम (Lose Weight) करने के अपने टारगेट में आपको एक काम ऐसा करना होगा जो आपके दिल को दुखा सकता है. भले ही आपको चीनी या मीठा (sugar) कितना ही पसंद हो यह कम करना होगा. वजन कम करने के लिए अपनी डाइट से मीठा ही नहीं स्टार्च (starches) और कार्बस (carbohydrates) भी कम करने होंगे. जब आप अपने आहार से इन्हें कम कर देंगे तो आप कम कैलोरी खाएंगे और शरीर पहले से मौजूद कैलोरी को बर्न करना शुरू कर देगा. इतना ही नहीं शुगर कम करने से आपके शरीर का इंसुलिन (insulin levels) भी नियंत्रित रहेगा और आपकी किडनी शरीर से अतिरिक्त सोडियम और पानी को निकाल बाहर करेगी.
3. वजन कम करने के लिए बढ़ाए अपना मेटाबॉलिज्म या चयापचय (Up your metabolism rate)
ग्रीन टी पिएं, अच्छी नींद लें, खूब प्रोटीन खाएं, भरपूर पानी पिएं, आपने खाने में कुकिंक फैट्स को बदलें, ज्यादा फाइबर खाएं यह सब आपके चयापचय यानी मोटाबॉलिज्म (increase your metabolism rate) को बेहतर बनाने में मदद करेंगे. जिसका सीधा असर कम होते वजन (lose weight) पर दिखेगा और आपकी मुस्कान पर भी.
Source - NDTV

‘दयाबेन’ के रोल के लिए मेकर्स ने इस TV एक्ट्रेस को किया अप्रोच!

‘दयाबेन’ के रोल के लिए मेकर्स ने इस TV एक्ट्रेस को किया अप्रोच!

पॉपुलर कॉमेडी शो ''तारक मेहता का उल्टा चश्मा'' में दिशा वकानी के ना लौटने के बाद मेकर्स नई दयाबेन की तलाश कर रहे हैं. पिछले दिनों मेकर्स ने कंफर्म किया था कि अब वे दिशा वकानी का और इंतजार नहीं करेंगे. मालूम हो कि दिशा वकानी सितंबर 2017 से शो में नहीं दिखी हैं. खबरों के मुताबिक, मेकर्स ने दयाबेन के रोल के लिए ''पापड़ पोल'' फेम एक्ट्रेस अमी त्रिवेदी को अप्रोच किया है.
हालांकि, जब इस बारे में अमी त्रिवेदी से संपर्क किया गया तो उन्होंने दयाबेन का रोल ऑफर होने की खबरों को गलत बताया. मगर टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में करीबी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि मेकर्स दिशा वकानी की जगह अमी त्रिवेदी को लेने की सोच रहे हैं. अमी ने कहा- ''नहीं, मुझे इस रोल के लिए अप्रोच नहीं किया गया है. लेकिन मेरे दोस्त मुझसे कह रहे हैं कि ये रोल मुझे करना चाहिए. दयाबेन का करेक्टर मुझ पर सूट करेगा. अभी मुझे रोल ऑफर नहीं हुआ है. ना ही मेकर्स ने मुझसे संपर्क करने की कोशिश की है.''
जब अमी से पूछा गया कि क्या मेकर्स द्वारा संपर्क करने पर वे दयाबेन का रोल करेंगी? जवाब में अमी ने कहा- ''ये एक बड़ी जिम्मेदारी होगी. किसी भी कलाकार के लिए दिशा वकानी का रोल करना मुश्किल होगा. मुझे यकीन है कि जो भी एक्ट्रेस दिशा का रिप्लेस करेगी उसे शुरूआत में कई आलोचनाओं को झेलना पड़ेगा. क्योंकि दिशा 10 साल से तारक मेहता.. से जुड़ी हुई थीं. लोग उन्हें प्यार करते हैं. जब तक मुझे शो से के लिए अप्रोच नहीं किया जाता मैं इस बारे में नहीं बोल सकती.''
बता दें, पिछले दिनों शो के प्रोड्यूसर असित मोदी ने कंफर्म किया था कि वे नई दयाबेन की तलाश कर रहे हैं. असित मोदी ने कहा था- ''मुझे नई दयाबेन की तलाश शुरू करनी पड़ेगी. कोई भी शो से बड़ा नहीं है. तारक मेहता का उल्टा चश्मा नए चेहरे के साथ आगे बढ़ेगा क्योंकि दयाबेन के बिना शो की फैमिली अधूरी है. हमने दिशा को छुट्टियां दीं, लेकिन हम हमेशा के लिए इंतजार नहीं कर सकते.''
Source - Aaj Tak

तेंदुलकर आज हो गए 46 के, जानिए क्या है ‘सचिन चौबीसा’

तेंदुलकर आज हो गए 46 के, जानिए क्या है ‘सचिन चौबीसा’

क्रिकेट की दुनिया में 24 वर्षों (1989-2013) तक छाए रहने वाले सचिन तेंदुलकर आज 46 साल के हो गए. महज 16 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले इस 'छोटे सचिन' ने 40 के हो जाने पर ही अपने बल्ले को आराम दिया. नहीं थकने वाले इस सफर के दौरान सचिन ने इतने कीर्तिमान रच डाले कि उन्हें 'क्रिकेट के भगवान' का दर्जा दे दिया गया.
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और 24 तारीख का खास रिश्ता है. यह वह दिन है, जिससे न सिर्फ उनके जीवन की शुरुआत हुई, बल्कि इसी तारीख को उन्होंने कई मंजिलें तय कीं. आइए जानते हैं सचिन के लिए क्यों अहम है 24 तारीख..?
24 अप्रैल 1973
24 अप्रैल 1973 को दिन में एक बजे मुंबई के शिवाजी पार्क राणाडे रोड स्थित निर्मल नर्सिंग होम में सचिन का जन्म हुआ था. उस वक्त उनका वजन 2.85 किग्रा था. और आगे चलकर यही शिशु क्रिकेट का युगपुरुष बन गया.
24 फरवरी 1988
24 फरवरी 1988 को नन्हे सचिन सुर्खियों में छा गए थे और दुनिया वाह-वाह कह उठी. दरअसल, उन्होंने इस दिन अपने बालसखा विनोद कांबली के साथ हैरिस शील्ड के सेमीफाइनल में नाबाद 664 रनों (तीसरे विकेट के लिए) की हैरतअंगेज साझेदारी की थी. उस भागीदारी के दौरान सचिन 326 और कांबली 349 रन पर नाबाद रहे थे. मुंबई के आजाद मैदान (ससानियन सीसी) पर शारदाश्रम विद्यामंदिर टीम के स्कूली खिलाड़ियों की यह जादुई बल्लेबाजी किसी करिश्मे से कम नहीं थी.
तब कांबली (16 साल ) और सचिन (14 साल) की यह भागीदारी किसी भी विकेट के लिए किसी भी श्रेणी के क्रिकेट में सबसे बड़ी साझेदारी थी. सचिन-कांबली ने ऑस्ट्रेलियाई जोड़ी टी. पैटॉन और एन. रिपॉन के रिकॉर्ड को ध्वस्त किया था. बुफैले टीम के लिए इन कंगारू बल्लेबाजों ने 1913/14 में 641 रनों की पार्टनरशिप की थी. हालांकि 19 साल बाद हैदराबाद में मनोज कुमार और मो. शैबाज ने 721 रन ( तीसरे विकेट के लिए) की साझेदारी कर सचिन-कांबली के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया.
24 नबंबर 1989
सचिन ने 24 नबंबर 1989 को 16 साल की उम्र में अपने टेस्ट करियर की पहली हाफ सेंचुरी (59 रन) बनाई थी. पाकिस्तान के खिलाफ अपने पहले दौरे में फैसलाबाद में उन्होंने सबसे कम उम्र में यह कारनामा किया था.
24 फरवरी 2010
सचिन ने 24 फरवरी 2010 को ग्वालियर के कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम में वह ऐतिहासिक पारी खेली, जिसके बारे में किसी ने सोचा तक न होगा. उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ नाबाद 200 रनों की पारी खेल कर वनडे क्रिकेट के 39 साल के इतिहास की पहली डबल सेंचुरी लगा दी.
24 मई 1995
तेंदुलकर ने 24 मई 1995 को गुजराती उद्योगपति आनंद मेहता और ब्रिटिश सामाजिक कार्यकर्ता एनाबेल मेहता की बेटी अंजलि से विवाह किया. सचिन अंजलि से छह साल छोटे हैं. दोनों की सगाई 1994 में न्यूजीलैंड में हुई थी.
24 सितंबर 1999
सचिन के बेटे अर्जुन तेंदुलकर का जन्म 24 सितंबर 1999 को मुंबई में हुआ था. अर्जुन बाएं हाथ से गेंदबाजी करते हैं, जो उनके पिता के विपरीत है. अर्जुन एक ऑलराउंडर के रूप में अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद में जुटे हैं.
24 अप्रैल 2011
इस दिन के साथ एक दुखद घटना भी जुड़ी है. करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र आध्यात्मिक गुरु सत्य साईं बाबा का निधन 24 अप्रैल 2011 को हुआ था. सचिन भी उनके भक्त हैं. सत्य साईं बाबा के निधन के चलते उस साल उन्होंने 24 अप्रैल को अपना जन्मदिन नहीं मनाया था.
Source - Aaj Tak

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