24 Jun 2019

वे खिलाड़ी, जिन्होंने भारत-PAK दोनों टीम के लिए खेला क्रिकेट


भारतीय क्रिकेट टीम ने अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से आईसीसी वर्ल्ड कप में 7वीं बार जीत हासिल की है. वहीं ऐसे में हम आपको उन खिलाड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो भारत-पाकिस्तान की क्रिकेट टीम में खेले हैं. आइए जानते हैं उनके बारे में.

आमिर इलाही का जन्म लाहौर में 1 सितंबर 1908 को हुआ था. उन्होंने भारत के लिए एक टेस्ट क्रिकेट मैच खेला था. जिसके बाद 1952-43 में पाकिस्तान की ओर से टेस्ट मैच के लिए परमिशन मिलने के बाद उन्होंने पाकिस्तान के लिए 5 टेस्ट मैच खेले.

RBI Deputy Governor Viral Acharya confirms resignation, cites 'personal reasons', last working day July 23


Viral Acharya confirmed his departure from the RBI six months before his term ends ‘due to unavoidable personal reasons’, in an email to MediaNama. His last day at the RBI will be on July 23, 2019. He expects to be at New York University’s Stern School of Business in Fall 2019.

The RBI’s deputy governor Viral Acharya has resigned six months before the scheduled end of his term, Business Standard reported (paywall). He had joined the central bank on January 23, 2017, for a three-year term, and was the RBI’s youngest deputy governor post-economic liberalisation. Acharya had resigned a few weeks before the last meeting of the RBI’s monetary policy committee earlier this month, per the report. MediaNama has reached out to the RBI for confirmation.

Sonakshi Sinha Urges Us To Talk About Sex In Her Upcoming Film For A Reason; Check Out This Trailer


Sonakshi Sinha’s upcoming movie Khandaani Shafakhaana revolves around getting people to talk openly about sex. Hopefully, this succeeds not just in reel life, but also in real life!

I have been lucky enough to have a rare experience in India – open, honest and uncensored conversations about sex. I got the opportunity because I studied Psychology, and we had a chapter on Sexual Dysfuctions. Our teacher, Mrs Tatke, without beating about the bush, or shying away or treating it as just another chapter, took the opportunity to make it a true learning experience, by throwing open the class to questions and discussions.

होम | देश | झारखंड में भीड़ ने मुस्लिम युवक की पीट...

INFORMATION CENTER: होम | देश | झारखंड में भीड़ ने मुस्लिम युवक की पीट...: झारखंड के सरायकेला जिले के खरसावां में चोरी के शक में भीड़ ने 24 साल के मुस्लिम युवक को जमकर पीटा, जिसकी बाद में मौत हो गई. तबरेज अंसारी न...

कहीं बुर्का तो कहीं जींस पहनने पर लगी रोक, ये हैं इन देशों के नियम



दुनिया में कई देश हैं और सभी देशों को अपने नियम और कानून हैं. ऐसे देश नागरिकों की सुरक्षा और जरूरत के अनुसार कुछ सेवाओं, खानपान और फैशन पर बैन लगा देते हैं. आइए जानते हैं किस देश ने किन चीजों पर बैन लगाया हुआ है.



पेड़ पर गिरा था इंदिरा के बेटे संजय गांधी का विमान, ऐसे निकालना पड़ा शव


23 जून 1980 को एक ऐसा हादसा हुआ जिससे पूरा देश सन्‍न रहा गया. आज ही रोज भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी का विमान दुर्घटना में निधन हो गया था. ये ऐसा विमान हादसा जिसने हर शख्स को दहला कर रख दिया. संजय गांधी को इंदिरा गांधी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता था. वह तेजतर्रार शैली और दृढ़ निश्चयी सोच और सादगी की वजह से वो देश की युवा पसंद थे. जानते हैं कैसे हुआ विमान हादसा.... 

बालाकोट के बाद तैयार थी नौसेना, 21 दिनों तक PAK पनडुब्बी के लिए चला सर्च ऑपरेशन


पुलवामा हमले के बाद भारतीय नौसेना पाकिस्तान को सबक सिखाने को तैयार थी. इस दौरान भारत ने नेवी को एक एक्सरसाइज से हटाकर पाकिस्तानी जल क्षेत्र के करीब तैनात कर दिया था. इंडियन नेवी एक वारशिप लेकर तैयार थी और इस वारशिप में परमाणु हमला करने की क्षमता थी. इस दौरान दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बाद नेवी ने पाकिस्तानी सेना की हर हरकत पर लगातार नजर रखी. बता दें कि बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद पाक पनडुब्बी पीएनएस साद समुद्र में गायब हो गई थी, इसके बाद हरकत में आई इंडियन नेवी ने मुंबई से लेकर गुजरात तक समुद्र में इस पनडुब्बी की तलाश कराई थी.


इन कामों के लिए कभी न इस्तेमाल करें क्रेडिट कार्ड.. पड़ेगा महंगा


अगर आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं तो शायद आप भी लगातार बढ़ रहे टैक्स और एक्स्ट्रा चार्ज से परेशान होंगे. कई बार आपको जहां डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करना होता है वहां आप गलती से क्रेडिट कार्ड स्वैप करवा देते हैं और इससे आपके क्रेडिट कार्ड का बिल बढ़ने की जगह और कुछ नहीं होता. तो चलिए आज जानते हैं कि किन जगहों पर क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से बचना चाहिए.



DELHI GOVT WILL BEAR STUDENTS' EXAM FEES FROM NEXT...

INFORMATION CENTER: DELHI GOVT WILL BEAR STUDENTS' EXAM FEES FROM NEXT...: In a felicitation ceremony organised by the government for students and their parents to celebrate their class 12 results, Delhi Chief Mi...

Deepika Padukone Was Asked For Her ID By Airport S...

ENTERTAINMENT TADKA: Deepika Padukone Was Asked For Her ID By Airport S...: Deepika Padukone is winning the hearts of fans and how. In case you don't know what we are talking about, we are referring to a vide...

22 Jun 2019

कई हीरो पर भारी पड़ गया था एक अकेला विलेन, अमर हो ...

ENTERTAINMENT TADKA: कई हीरो पर भारी पड़ गया था एक अकेला विलेन, अमर हो ...: अमरीश पुरी... बॉलीवुड की दुनिया का एक ऐसा नाम जो मुंबई हीरो बनने आया था लेकिन दुनिया उसे विलेन के रूप में पहचाने लगी। अमरीश पुरी का जन्...

14 Jun 2019

Cabinet approves signing of Memorandum of Understanding between India and Russia in the field of Railways

Cabinet approves signing of Memorandum of Understanding between India and Russia in the field of 

Railways



The Union Cabinet, chaired by the Prime Minister Shri Narendra Modi, was apprised of a Memorandum of Understanding on the cooperation between Research Designs and Standards Organisation, under the Ministry of Railways, India and Railway Research Institute, Russia and Research and Design Institute for Information Technology, Signalling and Telecommunication on Railway Transport, Russia.
The MoU will facilitate exchange of information, expert meetings, seminars, technical visits and implementation of jointly agreed cooperation projects.
The MoU was signed in April, 2019.

Use technology to improve governance and timely delivery of services to citizens: Vice President



Use technology to improve governance and timely delivery of services to citizens: Vice President

Digitization ensures transparency, builds confidence among investors;

Channelize the energy of young minds to make India the next economic power;

Tap the potential of technology to improve ease of business & enhance ease of living and happiness quotient;

8 Jun 2019

पंडिता रमाबाई सरस्वती: कंधा छोटा पड़ा, तो सिर पर उठा ली थी मां की अर्थी

पंडिता रमाबाई सरस्वती: कंधा छोटा पड़ा, तो सिर पर उठा ली थी मां की अर्थी

पूरा 1870 का दशक देश के लिए तबाही से भरा हुआ था. 1876-1878 के बीच देश के मैसूर और बॉम्बे के इलाके में भीषण अकाल पड़ा था. कई परिवार भेंट चढ़ गए थे इसकी. लेकिन इसके पहले और बाद के सालों तक असर दिखाई पड़ा था. 1873-74 में बिहार में अकाल पड़ा था. बंगाल ने मदद पहुंचा दी थी. तो बहुत ज्यादा बुरा असर नहीं पड़ पाया था. लेकिन मद्रास और बॉम्बे इतने सौभाग्यशाली नहीं थे. कई लोग मारे गए. कुल अनुमान 60 लाख से एक करोड़ तक का रखा गया. कई परिवार अपने अपने घर छोड़ संन्यासियों का जीवन काटते हुए ज़िन्दगी बिताने को मजबूर थे. मांग -मांग कर खाने से उनका काम चल रहा था.
इन्हीं में शामिल थे पुराणिक अनंत शास्त्री डोंगरे. उनकी पत्नी. लक्ष्मीबाई डोंगरे. बेटा श्रीनिवास डोंगरे. बड़ी बेटी. सबसे छोटी बेटी रमा डोंगरे. महाराष्ट्र के चितपावन ब्राह्मण. अनंत शास्त्री डोंगरे वेद-पुराण पढ़े थे. लोगों को सुनाकर घर का काम चलता था. अपनी पत्नी को संस्कृत पढ़ाई उन्होंने. इस बात से बिरादरी वाले खासे नाराज़ हुए थे. उनसे दूरी बनाए रखने के लिए वो लोग संतों की तरह घूम-घूम कर जीवन काटने लगे. लेकिन मद्रास पहुंचते-पहुंचते पंडित अनंत शास्त्री की हिम्मत जवाब दे गई. खाने-पीने को कुछ था नहीं. गरीबी बढ़ गई थी. जो कुछ जमा-जत्था था सब दान पुण्य में निकल गया था.उम्र हो चली थी. दिखाई देना बंद हो चुका था. एक मौके पर तो पूरे परिवार ने बैठ कर इंतज़ार किया कि कोई जंगली जानवर आकर उन्हें खा ले.
इसी तरह झेलते-झेलते एक दिन अनंत शास्त्री गुज़र गए. उनकी मौत के छह हफ्ते बाद ही उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई भी चल बसीं. जहां उनकी मौत हुई, वहां से श्मशान घाट कुछ दूरी पर था. वहां तक ले जाने के लिए कंधे कम पड़ रहे थे. कोई कंधा देने को तैयार नहीं था, पैसे भी नहीं थे कि किसी को दक्षिणा दी जा सके. किसी तरह दो ब्राह्मण तैयार हुए. तीसरा व्यक्ति श्रीनिवास. और चौथी रमा. लम्बाई कम थी. कंधे पर अर्थी झुक रही थी. हारकर उसका हत्था उन्होंने अपने सिर पर रख लिया. इस तरह अपनी मां को कंधा देकर रमा अंतिम संस्कार के लिए ले गईं.
और हमेशा हमेशा के लिए एक मिसाल खड़ी कर गईं. लेकिन ये उनके जीवन का पहला पड़ाव नहीं था जहां उन्होंने इतिहास रचा. अभी कई और ऐसे मौके आने थे.
रमा के पिता ने उन्हें संस्कृत तब पढ़ाई थी जब महिलाओं का संस्कृत पढ़ना निषिद्ध था. उन्होंने अपनी पत्नी को भी संस्कृत सिखाई. जब उस समय के ब्राह्मण अड़ गए, तो उन्होंने अपने तर्क के बचाव के लिए शास्त्रों में लिखी हुई बातों का हवाला दिया. रमा जल्दी ही सीख गईं. कहीं कहीं ये लिखा मिलता है कि 12 साल की उम्र तक उन्होंने 18000 श्लोक याद कर लिए थे भागवत पुराण के. अपने माता-पिता और बहन की मौत के बाद अपने भाई श्रीनिवास के साथ रमा निकल गईं पदयात्रा पर. घुमंतू साधुओं जैसा जीवन जीते हुए. कभी कोई काम मिल जाता तो कर लेते. लेकिन इतना पैसा कभी नहीं हो पाया कि कुछ आराम मिले. कुछ साध पूरी हो. लगभग चार हजार मील की यात्रा उन दोनों ने पैदल तय की. पानी में भिगोया अन्न नमक मिलकर खा लिया करते थे. ऐसे ही घूमते-घूमते कलकत्ता (अब कोलकाता) पहुंचे. वहां पर रमा की धाराप्रवाह संस्कृत देखकर वहां के विद्वान् दंग रह गए. उन्होंने कहा, साक्षात सरस्वती आ गई हैं हमारे बीच. इस तरह रमा को सरस्वती उपनाम मिला. कुछ समय बाद एक बंगाली भद्रलोक ने उनको पंडिता की उपाधि दी. इससे पहले केवल पंडित की ही उपाधि दी जाती रही थी. रमा पहली महिला थीं जिनको ये उपाधि मिली. कलकत्ता में रहकर उन्होंने कई लोगों से मुलाक़ात की. क्रिश्चियन धर्म के संपर्क में भीआईं. ब्राह्मो समाज से जुड़ीं.
1880 में रमा के भाई श्रीनिवास की मृत्यु हो गई. इसके बाद रमा ने बाबू बिपिन बिहारी दास मेधावी से शादी कर ली. कुछ जगहों पर इन्हें कायस्थ लिखा गया है. कहीं शूद्र बताया गया है. अंतरजातीय विवाह था. एक ब्राह्मण के लिए उस समय अपने से नीची जाति में शादी करना समाज में कड़ी आलोचना का बायस बन जाता था. दोनों की एक बेटी हुई, मनोरमा. लेकिन इसके एक साल बाद ही रमाबाई (बाई उन्हें आदर से कहा जाता था) के पति गुज़र गए. उन्हें कॉलरा हो गया था. पति की मौत के बाद अपनी बेटी के साथ वो मद्रास चली गईं. वहां से पूना (आज का पुणे) आईं. जस्टिस रानाडे ने रमाबाई को अपने यहां महिलाओं की मुक्ति पर लेक्चर देने के लिए बुलाया.
ये भी पढ़े - अफगानिस्‍तान में कमजोर पड़ता तालिबानी दुर्ग, जानें- इसका क्‍या है भारत-पाक फैक्‍टर

रमाबाई ने आर्य महिला समाज की स्थापना की. धीरे-धीरे रमाबाई का ईसाई धर्म की तरह झुकाव हुआ. कन्वर्ट होने का सोचने लगीं. मालूम था, इस कदम का बहुत बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा अपने देश में. लेकिन सब कुछ पेर रखकर 1883 में ईसाई धर्म अपना लिया उन्होंने.
1884 के सितम्बर में चेलटेनहैम लेडीज़ कॉलेज़, इंग्लैंड गईं. संस्कृत और मैथ्स पढ़ाया. दो साल बाद अमेरिका गईं. महीना था फरवरी. साल 1886. मौका था फिलाडेल्फिया के विमेंस मेडिकल कॉलेज में हो रहा एक महत्वपूर्ण ग्रेजुएशन. आनंदीबाई जोशी का. पहली भारतीय महिला जिसने वेस्टर्न मेडिसिन में ट्रेनिंग से मेडिकल डिग्री ली थी. पहले तो रमाबाई इंग्लैंड लौटने वाली थीं. लेकिन अमेरिका उन्हें भा गया. और वो वहीं रुक गईं. उन्होंने किताब लिखी- द हाई कास्ट हिन्दू वुमन. ये किताब उन्होंने आनंदीबाई जोशी को समर्पित की. आनंदी अपनी डिग्री मिलने के छह महीने के भीतर ही गुज़र गई थीं.
1889 में रमाबाई वापस भारत आईं. आने के छह हफ़्तों के भीतर ही उन्होंने शारदा सदन की स्थापना की. ये स्कूल उन्होंने उन महिलाओं के लिए खोला जो विधवा थीं, और उस समय समाज में उनके लिए कोई सम्मानजनक जगह नहीं थी. ये विधवाएं ऊंची जाति की थीं, और अपने आस-पास के समाज के शोषण की शिकार थीं. स्कूल सिर्फ तीन छात्राओं के साथ शुरू हुआ था, लेकिन पहला साल ख़त्म होते होते 25 छात्राएं आ गई थीं. इनमें से पांच स्कूल में ही रहती थीं. साल भर में रेजिडेंस में 18 छात्राएं आ गई थीं. इसके बाद रमाबाई पूना चली आईं.
मुक्ति मिशन की शुरुआत रमाबाई ने की. अपने बेटी मनोरमा के साथ काम में लगी रहीं. अपने ईसाई धर्म को भी एक्सप्लोर करती रहीं. 1921 में बेटी मनोरमा गुज़र गईं, उनके इस तरह जाने को रमाबाई झेल नहीं पाईं. अगले साल 1922 में वो भी गुज़र गईं. पर अपना नाम इतिहास में दर्ज करा गईं.
Source - Odd Nari

London To Get World’s First 360-Degree Infinity Pool – But How Do You Enter It?

London To Get World’s First 360-Degree Infinity Pool – But How Do You Enter It?

Ever wondered what swimming in a '360-degree' infinity pool would feel like? London might soon get the world's first one - and if the concept pictures are anything to go by, it would be a breathtaking experience.

The designs for the 600,000-liter pool, named Infinity London, have been unveiled by Compass Pools, reports CNN. The pool will sit atop a 55-storey building. The floors and sides will be kept transparent, allowing visitors to see the swimmers and sky above.
"When we designed the pool, we wanted an uninterrupted view, both above and below the water," says Compass Pool's swimming pool designer and technical director Alex Kemsley.
So if you're wondering how exactly one would enter the swimming pool, Compass Pools provides an answer.
On their website, they write: Swimmers will access the pool through a rotating spiral staircase based on the door of a submarine, rising from the pool floor when someone wants to get in or out.
ये भी पढ़े - इंसान ही नहीं पृथ्वी के लिए भी खतरा है तंबाकू, वजह जानकर रह जाएंगे दंग

"We faced some quite major technical challenges to this building, the biggest one being how to actually get into the pool," says Mr Kemsley. "Normally a simple ladder would suffice, but we didn't want stairs on the outside of the building or in the pool as it would spoil the view - and obviously you don't want 600,000 litres of water draining through the building either.
"The solution is based on the door of a submarine, coupled with a rotating spiral staircase which rises from the pool floor when someone wants to get in or out."
The infinity pool will be heated using waste energy from the air condition system for the building.
While its location is yet to be revealed, the Internet already has its eyes peeled.
What do you think of this 360-degree infinity pool? Let us know using the comments section.
Source - NDTV

“राधा-कृष्ण जैसे प्रेमियों के देश में प्यार, जाति और धर्म के आगे हार जाता है”

“राधा-कृष्ण जैसे प्रेमियों के देश में प्यार, जाति और धर्म के आगे हार जाता है”

जब मैं छोटा था तब से सुनता आ रहा हूं कि प्यार इस दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास है। बचपन की दहलीज़ को पार कर जब यौवन में कदम रखा तो इसे महसूस भी किया लेकिन जल्द ही हकीकत ने मुझे सपनों की दुनिया से निकालकर औंधे मुंह पटक दिया।
मैंने देखा कि जो भी मैं फिल्मों और गानों में सुनता व देखता आ रहा था, हमारा समाज उससे एकदम उलट है। 21वीं सदी के इस भारत में आज भी लोग प्यार के ऊपर जाति अथवा धर्म को ही तरज़ीह देते हैं। यही नहीं, हमारे समाज में आज भी ऑनर किलिंग जैसी घटनाएं बड़े स्तर पर हो रही हैं और हमें इसकी परवाह तक नहीं।
जब से मैंने एक रीजनल न्यूज़ चैनल में काम करना शुरू किया है, तब से रोज़ प्यार करने वालों की हत्या की खबरेंं सुन-सुनकर ही मेरा दिन गुज़रता है। दिमाग यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि क्या किसी इंसान को मार देना इतना ही आसान है? क्या चुनाव के दौरान भारत में बदलाव की बातें महज़ एक धोखा हैं? क्या हमारी शिक्षा प्रणाली एकदम फेल हो गई है? यह कुछ ऐसे सवाल हैं जो हर वक्त मेरे मन में घूमते रहते हैं।
क्या प्यार करना गुनाह है?

हमारे माता-पिता और हमारा परिवार हमारी ज़िंदगी का सबसे अहम हिस्सा हैं और होने भी चाहिए लेकिन क्या उन्हें किसी की जान लेने या हमें प्यार करने से रोकने का हक है? अगर हम अपने दिल की बात अपने माता पिता से ही नहीं कर सकते तो अब हम किसके पास जाएं?
आज नफरत और जातिवाद की राजनीति ने प्यार को और कठिन बना दिया है। एक मुसलमान होने के नाते मैं किसी और जाति की लड़की से प्यार करना तो दूर, बात तक नहीं कर सकता क्योंकि मैं फौरन या तो ‘लव जिहादी’ बन जाऊंगा या फिर कोई ठग।
प्यार के मामले में परिवार भी अलग हो जाता है

मैं समझता हूं कि जाति या धर्म के मामले में मतभेद स्वाभाविक है और इसकी संभावना अधिक है कि प्रेमी जोड़ा इस बात के बोझ तले अपने रिश्ते को तोड़ दे और ऐसे में माता-पिता और अन्य करीबी लोगों को उनका मार्गदर्शन करना और उनको अपनी राय बताना ना सिर्फ उनका हक है बल्कि ज़रूरी भी है, लेकिन क्या आप किसी पर ज़बरदस्ती दबाव बनाकर उनसे उनका रिश्ता तुड़वा सकते हैं। हमें एक समाज के रूप में अपनी हदों को समझना होगा।
Also Read - WORLD HAPPINESS IS AT ITS LOWEST IN 10 YEARS ACCORDING TO THIS NEGATIVE INDEX EXPERIENCE

मुझे हैरानी होती है कि ‘राधा-कृष्ण’, ‘राम-सीता’ और ‘शिव-पार्वती’ जिनकी यह देश पूजा करता है और जिनकी प्यार की कहानियां टीवी पर देख-देखकर हम सभी बड़े हुए, उन्हीं के देश में प्यार आज भी जातिवाद और धर्म के सामने कमज़ोर है। वैलेंटाइन्स डे के दिन धर्म का चोला पहनकर प्रेमी जोड़ों की पिटाई करने वाले काश एक बार उस धर्म में प्यार की महानता का ज्ञान ले पाते।
उनके लाठी-डंडों के सामने कानून व प्रशासन एकदम लाचार दिखाई देता है। हैरानी की बात तो यह है कि पढ़े-लिखे लोग भी सोशल मीडिया पर इन दलों को लेकर चुटकुले ओर मीम बनाकर हंसते हैं।
मुझे यह सब सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या हम लोकतंत्र की महानता को समझते हैं? क्या हम लोकतंत्र के लायक हैं और सबसे बड़ा सवाल कि क्या हमारा लोकतंत्र जीवित रहेगा? मेरे पास इन सब सवालों के जवाब नहीं हैं मगर मैं इतना ज़रूर जानता हूं कि बहुत से लोग अपने प्यार से दूर रह जाते हैं इसलिए नहीं कि वो एक-दूसरे के कम्पेटिबल नहीं है या दोनों के इंट्रेस्ट अलग हैं बल्कि इसलिए कि उनकी जाति और धर्म मेल नहीं खाता।
ये समस्या कैसे दूर होगी यह तो मैं नहीं जनता लेकिन कुछ उपाय हम कर सकते हैं। हमें लाठी-डंडे लेकर निकलने वाले इन लोगों पर तुरंत प्रतिबंध की मांग करनी चाहिए। अपने लोकतान्त्रिक अधिकारों के बारे में जानकारी हासिल करनी चाहिए। सरकार और प्रशासन को उनके काम के प्रति सवाल पूछना चाहिए और अपनी शिक्षा प्रणाली को ठीक करना चाहिए और मिलकर प्यार करना और करने देना चाहिए। क्योंकि प्यार से खूबसूरत सच में कुछ नहीं।
Source - Yooth Ki Awaj

Follow by Email