चारा घोटाला: लालू दोषी करार, फैसले का राजद पर क्या पड़ेगा असर? जानिए

चारा घोटाला: लालू दोषी करार, फैसले का राजद पर क्या पड़ेगा असर? जानिए
चारा घोटाला: लालू दोषी करार, फैसले का राजद पर क्या पड़ेगा असर? जानिए
शनिवार, 23 दिसंबर का दिन लालू यादव के लिए अहम रहा, चारा घोटाला मामले में रांची की स्पेशल सीबीअाइ कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया है। राजद के लिए अब संकट की घड़ी है।
पटना [काजल]। शनिवार को चारा घोटाला मामले में आज सीबीआइ की विशेष कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है और राजद सुप्रीमो को दोषी करार दिया है। देवघर कोषागार से जुड़े चारा घोटाला मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू यादव को दोषी और जगन्नाथ मिश्र को बरी कर दिया है।
इस फैसले पर आज पूरे देश की निगाह टिकी हुई थी और इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ी बात ये है कि लालू को जेल के बाद राजद की कमान को कौन संभालेगा?

लालू को हुई अगर तीन साल से ज्यादा की सजा तो होगी मुश्किल
दोषी करार दिए जाने के बाद संभावना है कि लालू को दो साल से सात साल तक की सजा हो सकती है। सीबीआइ कोर्ट अगर लालू को सजा सुनाती है तो लालू अपनी जमानत की कोशिश करेंगे। लेकिन यह बात भी अहम है कि अगर लालू को तीन साल से अधिक की सजा हुई तो उन्हें जेल जाने से कोई नहीं बचा सकेगा। 
आज का दिन है लालू के लिए खास
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद व डॉ. जगन्नाथ मिश्र सहित अन्य आरोपियों में से कुछ को बरी किया गया तो कुछ को दोषी करार दिया गया। फैसले के लिए शुक्रवार की शाम को ही रांची पहुंच थे। फैसला शिवपाल सिंह की अदालत ने सुनाया और लालू के साथ तेजस्वी भी मौजूद रहे।
लालू यादव, जगन्नाथ मिश्र सहित 22 आरोपियों पर न्यायालय में ट्रायल चला था और देवघर कोषागार से  करीब 90 लाख रुपये निकासी की बात सामने आई है। मामले में 34 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया गया था, जिनमें से कई आरोपियों का निधन हो चुका है तो वहीं दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए थे।
लालू ने कहा-न्याय व्यवस्था पर विश्वास था और है, फैसला होगा मंजूर
गुरुवार को लालू प्रसाद ने एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा था कि चारा घोटाला के मामले में साफ-साफ दस्‍तावेजों के साथ जो आरोप सीबीआई ने मुझपर लगाए उसका जवाब हम निचली अदालत में दे चुके हैं। हमने भी अदालत में बयान दिया है। मुझ पर चारा घोटाले को लेकर अलग-अलग केस दर्ज हुए। सब पर एक ही आरोप है, पर अलग-अलग ट्रायल चल रहा है।
उन्होंने कहा था कि ये लोग लालू की शक्ति को जानते हैं कि ये डरने वाला नहीं है। इन्होंने हम पर और हमारे बच्चों पर केस करके हमको नीचा दिखाने की कोशिश की है। नीतीश कुमार, सुशील मोदी, बीजेपी, आरएसएस जानते हैं कि लालू से मुकाबला नहीं हो सकता है, इसलिए इसे रोक दो।
फैसले से अब बदल सकता है राजद का समीकरण
चारा घोटाले में जुड़े 3 मामलों पर 23 दिसंबर को फैसला आने के बाद लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिए जाने के बाद तत्काल उन्हें जेल जाना पड़ा है और उसके बाद राजद में बिखराव की भी आशंका जताई जा रही है।हालांकि राजद नेताओं ने कहा है कि एेसा सपना देखने वालों की मंशा कभी पूरी नहीं होगी।
लालू प्रसाद के जेल जाने के बाद जेडीयू का दावा है कि लालू के जेल जाने के बाद आरजेडी में तेज भागमभाग होगी। सूत्रों के अनुसार, आरजेडी के अंदर कुछ सीनियर नेता मौके की तलाश में हैं, जो मौका पड़ने पर पाला बदल सकते हैं। उधर कांग्रेस में भी लालू के जेल जाने की संभावना के बाद खलबली मच सकती है।
मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के डेढ़ दर्जन विधायक पहले ही एनडीए की राज्य सरकार से संपर्क में है। ऐसी स्थिति आने पर वह नैतिकता की दुहाई देकर जा मौके का फायदा उठा सकते हैं। लेकिन, कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार लालू प्रसाद के जेल जाने की स्थिति में भी बिहार में उनके साथ अभी गठबंधन पर असर नहीं पड़ेगा। 
लालू के बाद क्या तेजस्वी संभाल पाएंगे राजद की कमान?
पार्टी के नेताओं का दावा है कि तेजस्वी यादव लालू प्रसाद के उत्तराधिकारी घोषित हो चुके हैं और वे ही आरजेडी की कमान संभालेंगे, उनमें वो क्षमता है, जिसे देखकर ही पार्टी ने उन्हें कमान सौंपी है। लेकिन,तेजस्वी को अभी राजनीति की उतनी समझ नहीं है, उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है। एेसे में उनके लिए भी पार्टी की कमान को संभालना चुनौतियों से भरा होगा।
बता दें कि पहली बार चारा घोटाले में सीएम का पद छोड़कर लालू प्रसाद जब जेल गए थे तो उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री पद पर बिठाया था। लेकिन तब से लेकर अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। पार्टी के भीतर अब वैसी बात नहीं रही है।
नीतीश के साथ मिलकर राजद ने सत्ता में की थी जोरदार वापसी
सत्ता से दूर रहने के बाद राजद ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में वापसी की और धुर विरोधी रहे नीतीश कुमार से हाथ मिलाकर लालू ने पार्टी को फिर से मजबूत आधार दिया और महागठबंधन के साथ फिर से बिहार की राजनीति में वापसी की।
सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी राजद ने बिहार की जनता का विश्वास जीता और लालू ने अपने दोनों बेटों को सत्ता के प्रमुख पदों पर बिठाया, लेकिन महागठबंधन टूटने के बाद राजद एक बार फिर से हाशिए पर है और उसके सामने कई चुनौतियां हैं और एेसे में अगर लालू को जेल हो जाती है तो पार्टी के भीतर का  विरोध भी खु्लकर सामने आ सकता है।
आइए जानें क्या है चारा घोटाला...
चारा घोटाला बिहार सरकार के ख़ज़ाने से 900 करोड़ की राशि को ग़लत ढंग से निकालने का है। यह सिलसिला कई वर्षों तक चला और पशुपालन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों ने राजनीतिक मिली-भगत के साथ रुपये की निकासी की।
यह घोटाला जांच के बाद सामने आया और तब पता चला कि ये सिलसिला वर्षों से चल रहा था। शुरुआत छोटे-मोटे मामलों से हुई लेकिन बात बढ़ते-बढ़ते तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तक जा पहुंची।
मामला एक-दो करोड़ रुपए से शुरू होकर अब 900 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा और कोई पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि घपला कितनी रक़म का है क्योंकि यह वर्षों से होता रहा है और बिहार में हिसाब रखने में भी भारी गड़बड़ियां हुईं।
एेसे खुली घोटाले की पोल
बिहार पुलिस ने 1994 में राज्य के गुमला, रांची, पटना, डोरंडा और लोहरदगा जैसे कई कोषागारों से फर्ज़ी बिलों के ज़रिए करोड़ों रुपए की कथित अवैध निकासी के मामले दर्ज किए। रातों-रात सरकारी कोषागार और पशुपालन विभाग के कई सौ कर्मचारी गिरफ़्तार कर लिए गए, कई ठेकेदारों और सप्लायरों को हिरासत में लिया गया और राज्य भर में दर्जन भर आपराधिक मुक़दमे दर्ज किए गए। 
इसके बाद इस घोटाले की सीबीआई ने जांच करनी शुरू की और जांच की कमान संयुक्त निदेशक यूएन विश्वास को सौंपी गई और घोटाले का पर्दाफाश शुरू हुआ। शुरुआती जांच के बाद ही सीबीआइ ने कहा कि मामला उतना सीधा-सादा नहीं है जितना बताया जा रहा।
सीबीआई के अनुसार, राज्य के ख़ज़ाने से पैसा कुछ इस तरह निकाला गया- पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चारे, पशुओं की दवा आदि की सप्लाई के लिए करोड़ों रुपए के फ़र्जी बिल कोषागारों से वर्षों तक नियमित रूप से भुनाए। जांच अधिकारियों का कहना है कि बिहार के मुख्य लेखा परीक्षक ने इसकी जानकारी राज्य सरकार को समय-समय पर भेजी थी लेकिन बिहार सरकार ने इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
राज्य सरकार की वित्तीय अनियमितताओं का हाल ये है कि कई-कई वर्षों तक विधानसभा से बजट पारित नहीं हुआ और राज्य का सारा काम लेखा अनुदान के सहारे चलता रहा है।
सीबीआई का कहना है कि उसके पास इस बात के दस्तावेज़ी सबूत हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री को न सिर्फ़ इस मामले की पूरी जानकारी थी बल्कि उन्होंने कई मौक़ों पर राज्य के वित्त मंत्रालय के प्रभारी के रूप में इन निकासियों की अनुमति दी थी।
सीबीआई के कमान संभालते ही चारा घोटाला मामले में बड़े पैमाने पर गिरफ़्तारियां हुईं और छापे मारे गए। लालू प्रसाद यादव के ख़िलाफ़ सीबीआई ने आरोप पत्र दाख़िल कर दिया जिसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा और बाद में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने तक वे कई महीनों तक जेल में रहे।
लालू को हुई जेल....
जेल से रिहा होने के बाद भी लालू का इस घोटाले से नाता बना रहा और उन्हें कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ा। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस घोटाले में गवाही और सुबूतों के आधार पर सीबीआइ की विशेष अदालत ने सजा सुना दी है एेसे में अब तेजस्वी तेजप्रताप पर पार्टी की जिम्मेदारी आ गई है कि वो पार्टी को एकजुट रखें। 

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