ITR फाइल करते वक्त इन 8 खर्चों को क्लेम करना न भूलें, बचेगा आपका टैक्स



आज हम आपको उन टैक्स छूट के बारे में बता रहे हैं, जिसके बारे में काफी कम लोगों को जानकारी होती है. इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दौरान अपने कुछ खर्चों की जानकारी देकर आप टैक्स में छूट क्लेम कर सकते हैं.

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के लिए अब आपके पास कुछ ही दिन बाकी हैं. 31 जुलाई तक आईटीआर नहीं फाइल करने पर आपको 5000 रुपये तक का जुर्माना भी देना पड़ सकता है. आज हम आपको उन टैक्स छूट के बारे में बता रहे हैं, जिसके बारे में काफी कम लोगों को जानकारी होती है. इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दौरान अपने कुछ खर्चों की जानकारी देकर आप टैक्स में छूट क्लेम कर सकते हैं.



HRA के बिना रेंट में छूट: ऐसे बहुत से करदाता हैं, जो मकान का किराया देते हैं, लेकिन सैलरी में एचआरए न होने के चलते डिडक्शन क्लेम नहीं कर पाते. सेक्शन 80GG के तहत आप रेंट पर बेनिफिट क्लेम कर सकते हैं, चाहे आपकी सैलरी में एचआरए शामिल हो या नहीं. हालांकि आप तब इसे क्लेम नहीं कर सकते, जब घर आपकी पत्नी या पति या फिर बच्चों के नाम हो. यह छूट इनकम से 10 फीसदी तक के किराये पर ही मिलेगी.

दिव्यांग बच्चे की आय पर छूट: यदि आप अपने पति या पत्नी और नाबालिग बच्चे के नाम पर कोई निवेश करते हैं तो उससे होने वाली आय पर भी सेक्शन 64 के तहत टैक्स लगता है. लेकिन, यदि आपका बच्चा दिव्यांग है तो उससे होने वाली आय पर टैक्स में रियायत मिलती है.

सेविंग्स अकाउंट पर ब्याज: सेविंग अकाउंट में जमा बैलेंस पर हर तिमाही में आपको ब्याज मिलता है. इकनम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 80TTA के तहत 10,000 रुपये तक के ब्याज पर आपको आयकर में छूट मिलती है. पोस्ट ऑफिस सेविंग्स पर मिलने वाले ब्याज में भी इसी तरह की छूट मिलती है.

कौन सी बीमारियां होती हैं कवर: एटेक्सिया, एड्स, कैंसर, डिमेंशिया, हैजा, थैलासीमिया, किडनी फेल होना, पार्किंसन, हीमोफीलिया, डिस्टोनिया और एफेशिया आदि. इनकम टैक्स कानून की धारा 80DDB के तहत आप खुद या बच्चों की किसी खास बीमारी पर किये गए खर्च को कवर कर सकते हैं. कोई आयकर दाता अपने माता-पिता, बच्चे, आश्रित भाई-बहनों और पत्नी के इलाज में खर्च की गई 40,000 रुपये तक की रकम पर इनकम टैक्स में छूट का दावा कर सकता है. अगर मरीज वरिष्ठ नागरिक है तो यह कटौती 60,000 रुपए तक हो सकती है. एचऐंडआर ब्लॉक में टैक्स रिसर्च हेड चेतन चांडक ने कहा, 'अगर मरीज सुपर सीनियर सिटीजन है तो इलाज पर खर्च की रकम में से 80,000 रुपये पर टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है.'

होम लोन के अन्य चार्जेज में भी मिलती है छूट: होम लोन लेने वाले लोगों को यह तो मालूम होता है कि इसके प्रिंसिपल अमाउंट और ब्याज पर टैक्स में छूट मिलती है. लेकिन, यह जानकारी बहुत कम लोगों को होती है कि इस लोन के लिए चुकाई जाने वाली प्रॉसेसिंग फीस को भी सेक्शन 24 के तहत क्लेम किया जा सकता है. प्रॉसेसिंग फीस और अन्य चार्जेज को इनकम टैक्स ऐक्ट के तहत इंटरेस्ट में ही काउंट किया जाता है और उस पर छूट मिलती है.





डाउन पेमेंट के लिए लोन पर छूट: होम लोन लेने वाले कई कर्जधारक ऐसे भी हैं, जिन्हें डाउन पेमेंट करने के लिए भी मित्रों और रिश्तेदारों से कर्ज लेना पड़ता है. वह कई बार इस पर कोई ब्याज नहीं चुकाते और यदि चुकाते भी हैं तो उसे क्लेम नहीं करते. जबकि सेक्शन 24 के तहत इस पर चुकाए ब्याज को क्लेम किया जा सकता है. यही नहीं सेक्शन 24 के तहत आप मकान की खरीद, रीनोवेशन और रीकंस्ट्रशन के मकसद से लिए गए किसी भी लोन के इंटरेस्ट को क्लेम कर सकते हैं.

दिव्यांग टैक्सपेयर्स को छूट: यदि कोई टैक्सपेयर 40 फीसदी तक दिव्यांग है और मेडिकल अथॉरिटी की ओर से सर्टिफाइड है तो वह सेक्शन 80U के तहत 75,000 रुपये तक क्लेम कर सकते हैं. यही नहीं दिव्यांगता यदि 80 फीसदी तक हो तो डिडक्शन 1.25 लाख रुपये तक क्लेम कर सकते हैं. यह फ्लैट डिडक्शन है.

इन्वेस्टमेंट पर लॉस को भी करें क्लेम: यदि आपको बीते वित्त वर्ष में निवेश में किसी तरह का नुकसान हुआ हो तो आप उसे क्लेम कर सकते हैं. स्टॉक्स को बेचने, प्रॉपर्टी, गोल्ड और डेट फंड्स के कैपिटल गेन्स में हुए नुकसान को आप अजस्ट कर सकते हैं



Source - News 18 

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