सीनियर सिटीजन मार्केट पर बढ़ रहा कंपनियों का फोकस



ट्रैवल से लेकर टेक्नोलॉजी तक कई सेगमेंट्स में बुजुर्गों को ध्यान में रखकर प्रॉडक्ट्स लॉन्च कर रही हैं कंपनियां

अपने पति के रिटायर होने के बाद 59 वर्षीया रेगी थॉमस ने भी अपनी कंपनी से वीआरएस ले लिया ताकि वह पति के साथ दुनिया घूमने का आनंद उठा सकें। रेगी के पति बीपीसीएल में जनरल मैनेजर थे, जबकि वह एक ट्रैवल कंपनी में बतौर ट्रेनर काम करती थीं। कोच्चि की रहने वाली रेगी अपने पति के साथ भारत के लगभग सभी हिस्सों में ट्रैवल कर चुकी हैं। इसमें गुजरात का एक महीने का ट्रैवल भी शामिल है। इसके अलावा यह जोड़ा विदेश में भी छुट्टियां बिता चुका है। इसी साल इन लोगों ने एक हफ्ता अमेरिका में बिताया, जिस दौरान इन्होंने वेस्ट कोस्ट से ईस्ट कोस्ट की तरफ ट्रैवल किया। रिटायर होने के बाद बोर होने की जगह कपल अब इसे दुनिया घूमने के अपने शौक को पूरा करने के मौके की तरह देख रहे हैं। ट्रैवल कंपनियां भी अब सीनियर सिटीजन हॉलिडे कैटेगरी में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रही हैं।




मार्केट रिसर्च फर्म फ्रॉस्ट एंड सुलिवन की 2013 में आई सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक सीनियर सिटीजन ट्रैवलर्स की संख्या 7 गुना बढ़कर 73 लाख होने का अनुमान है। ट्रैवल कंपनी थॉमस कुक इस मार्केट को सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट्स में शुमार कर रही है, जहां से उसके कुल बिजनेस का 35 पर्सेंट आता है। थॉमस कुक के प्रेसिडेंट और कंट्री हेड राजीव काले ने बताया, 'जल्दी रिटायरमेंट, अच्छी आमदनी और हेल्दी लाइफस्टाइल की वजह से लोगों के पास फुर्सत के पलों में इजाफा हुआ है, जिससे ट्रैवल की मांग बढ़ी है। हमारे इंटरनल डेटा के मुताबिक हर साल इसमें 18 से 20 पर्सेंट सालाना ग्रोथ दिख रही है।'

ट्रैवल इकलौती कैटेगरी नहीं हैं जिसमें सीनियर सिटीजन सेगमेंट में ग्रोथ देख रही है। राहुल गुप्ता ने 60 से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए 'सीनियर वर्ल्ड' नाम से एक स्टार्टअप लॉन्च किया है क्योंकि उन्हें लगता है कि इस उम्र के लोगों को सोसायटी में अकेले छोड़ दिया गया है। राहुल को इसकी प्रेरणा अपने परिवार से मिली। राहुल के माता-पिता की उम्र 80 साल से ज्यादा है। राहुल ने बताया, 'ये बुजुर्ग काफी ज्यादा शिक्षित हैं, लेकिन ये फिर भी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने से डरते हैं।'

यही सोचकर राहुल की स्टार्टअप ने कई वैरायटी के मोबाइल फोन, ग्रुप ट्रैवल पैकेज और मोशन सेंसर लाइट्स लॉन्च किए हैं। मोबाइल फोन को इस तरह बनाया गया है कि ऊंचा सुनने वाले बुजुर्ग भी उससे आसानी से बात कर सकें। राहुल ने अपनी स्टार्टअप से जुड़ा कोई आंकड़ा तो नहीं बताया, लेकिन उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी के रेवेन्यू में सालाना 100 पर्सेंट ग्रोथ हो रही है। राहुल गुप्ता की कंपनी के अलावा 'सीनियर शेल्फ' नाम की एक और स्टार्टअप है, जो बुजुर्ग लोगों को ध्यान में रखकर प्रॉडक्ट बनाती है। 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में 10.4 करोड़ सीनियर सिटीजन हैं, ऐसे में कंपनियों ने अब इस सेगमेंट में संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं।

Source  - Nav Bharat 


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