थ्योरी-लेक्चर से अलग IIM के तीन प्रोफेसर खोज रहे बेहतर टीचिंग का तरीका, इंटीग्रेटिव लाइव केस मेथड से समझा रहे बिज़नेस एथिक्स


दुनियाभर के बिज़नेस स्कूल्स में किसी विषय को पढ़ाने के दो तरीके अपनाए जाते हैं। एक क्लासरूम लेक्चर और दूसरा केस बेस्ड मेथड। आईआईएम इंदौर के प्रोफेसर जी. वेंकट रमन, प्रोफेसर स्वप्निल गर्ग और प्रोफेसर स्नेहा थापलियाल ने बिज़नेस एथिक्स पढ़ाने के लिए एक नए तरीके इंटीग्रेटिव लाइव केस मेथड पर रिसर्च की। इस रिसर्च को जर्नल ऑफ बिज़नेस एथिक्स में जगह भी मिल चुकी है। इसके इफेक्टिवनेस को परखने के लिए तीनों प्रोफेसर्स ने 300 स्टूडेंट्स पर एक महीने तक वर्कशॉप के ज़रिए कम्पेरेटिव स्टडी की। स्टूडेंट्स के तीन ग्रुप्स को अलग-अलग मेथड के ज़रिए पढ़ाकर ये स्टडी पूरी की गई। आईआईएम प्रोफेसर्स द्वारा इंस्टिट्यूट के बाहर जाकर किया गया संभवत: यह पहला प्रयोग है।


प्रोफेसर जी. वेंकट रमन ने बताया- यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ बिज़नेस जैसे दुनिया के टॉप बी स्कूल्स, बरसों से केस स्टडी के ज़रिए स्टूडेंट्स को बिज़नेस मैनेजमेंट की लर्निंग दे रहे हैं। हमारे देश के बी-स्कूल्स से उलट वहां बरसों पुराने या लंबे समय से पढ़ाए जा रहे केस की जगह इंडस्ट्री के करंट प्रॉब्लम्स को केस स्टडी की तरह पढ़ाया जाता है क्योंकि वहां इंडस्ट्री-एकेडमिक इंटरफेस बहुत स्ट्रॉन्ग है। हमारे यहां ये इसलिए संभव नहीं कि एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन्स और इंडस्ट्री, एक दूसरे को तवज्जो नहीं देते। स्टूडेंट्स को ज्यादा सटीक समस्या से रूबरू करवाने के लिए हमने ऑटोमोबाइल सेक्टर की मल्टीनेशनल कंपनी का ऑनगोइंग केस स्टडी के तौर पर लिया। आईएमएस के मार्केटिंग मैनेजमेंट, फॉरेन ट्रेड और फाइनेंशियल एडमिनिस्ट्रेशन के फर्स्ट सेमेस्टर के 300 स्टूडेंट्स को शामिल किया है। एक्सपेरिमेंट कर रहे रिसर्चर्स के अनुसार बिज़नेस एथिक्स पढ़ाने के लिए हमने स्टूडेंट्स के तीन में से दो ग्रुप्स को ट्रेडिशन लेक्चर और केस बेस्ड मैथड का उपयोग किया। तीसरे ग्रुप को इंटिग्रेटिव लाइव केस मेथड के ज़रिए पढ़ाया। नामी कार कंपनी के ब्रेकडाउन की दुनियाभर में छपी खबरों को आधार बनाकर लाइव केस तैयार किया। इस ग्रुप के स्टूडेंट्स को टेक्नोलॉजी का उपयोग कर उस ब्रेकडाउन के इंडिविजुअल, ऑर्गनाइज़ेशनल और सोसायटल लूप होल्स पता करने के साथ ही मल्टीडाइमेंशनल पर्सपेक्टिव्स खोजने थे। ये सब उन्हें बगैर किताबों और टीचर्स के, स्टूडेंट्स के बीच डिस्कशन के ज़रिए करना था। वर्कशॉप के रूप में महीने भर किए गए इस एक्सपेरिमेंट का उद्देश्य उस रिसर्च की इफेक्टिवनेस को परखना था जो तीनों प्रोफेसर्स ने बिज़नेस इथिक्स पढ़ाए जाने के तरीकों पर की थी। ये रिसर्च एक नामी जरनल में पब्लिश भी की जा चुकी है। 

प्रोफेसर्स के अनुसार इंटीग्रेटिव लाइव केस मेथड में चूंकि ऑनगोइंग केस लिया जाता है इसलिए स्टूडेंट्स किसी पूर्वाग्रह या विचार से अलग होते हैं। ताज़ा होने के कारण उसकी प्रासंगिकता भी होती है और कई सारे लोगों से उसका कनेक्ट भी होता है। इसमें लेक्चर मैथड की बेस्ट चीजों के साथ कॉन्सेप्चुअल अंडरस्टैंडिंग पर जोर दिया जा सकता है।

Source - Dainik Bhaskar 


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