3 में से सिर्फ 1 किसान को मिलता है कर्जमाफी का फायदा, चौंका देगी ये रिपोर्ट

3 में से सिर्फ 1 किसान को मिलता है कर्जमाफी का फायदा, चौंका देगी ये रिपोर्ट

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा की विधानसभा चुनावों में हार और बीते वर्ष देश के कई हिस्सों में किसान आंदोलन के चलते कृषि क्षेत्र की चुनौतियां राष्ट्रीय मुद्दा बना. यह जरूरी भी था क्योंकि कृषि क्षेत्र देश में कुल रोजगार का 49 फीसदी है और देश की लगभग 70 फीसदी जनसंख्या इसपर आधारित है.
इस सच्चाई के बावजूद कृषि क्षेत्र हाशिए पर रहा है. वहीं मौजूदा समय में भी ये मुद्दा राजनीतिक लाभ और लोकलुभावन नीतियों के चलते किसान कर्जमाफी, अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य और हाल ही में तेलंगाना के रायथू बंधु स्कीम इर्दगिर्द सीमित है.
हमें समझने की जरूरत है कि किसानों की समस्या रातों-रात नहीं पैदा हुई. नीति आयोग की 2017 की रिपोर्ट, किसानों की आमदनी को दोगुनी करने की पहल समेत कई ऐसी समीक्षा से साफ कि किसानों की समस्या 1991-92 में शुरू हुई. इस समय तक दोनों कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में समान स्तर पर विकास हो रहा था.
जानें, किसानों को इस भंवर से निकालने के लिए क्या किया गया है.
कर्जमाफी से कुछ किसानों को फायदा, भूमिहीन के लिए बेअसर
कर्जमाफी किसी बिमारी का इलाज नहीं बल्कि कुछ किसानों को तत्काल प्रभाव से राहत पहुंचाने का एक जरिया है. इसका फायदा सिर्फ उन किसानों को मिलता है जिन्होंने संस्थागत कर्ज लिए हैं. पिछला एनएसएसओ सर्व 2013 के मुताबिक देश में 52 फीसदी कृषि परिवार कर्ज में डूबे हैं और इसमें महज 60 फीसदी परिवारों ने किसी संस्था से कर्ज लिया है. लिहाजा, साफ है कि महज 31 फीसदी (52 फीसदी का 60 फीसदी) कृषि परिवारों को कर्जमाफी का फायदा पहुंचने की उम्मीद है.
ऐसा ही निष्कर्ष नाबार्ड की 2015-16 की रिपोर्ट से निकलता है. रिपोर्ट के मुताबिक 43.5 फीसदी किसान परिवारों ने इस वर्ष के दौरान कर्ज लिया (हालांकि 52.5 फीसदी परिवार कर्ज में डूबे थे). इनमें 60.4 फीसदी परिवारों ने किसी संस्था से कर्ज लिया वहीं 9.2 फीसदी परिवारों ने दोनों किसी संस्था अथवा गैर संस्था श्रोत से कर्ज लिया. इन आंकड़ों से भी कर्जमाफी का फायदा महज 30 परिवारों को मिलता है(43.5 फीसदी का 69.5 फीसदी).
इन आंकड़ों में जो सच्चाई छिपी है वह है कि कर्जमाफी का कोई फायदा भूमिहीन किसानों तक नहीं पहुंचता है. आंकड़ों में उनकी संख्या कुल ग्रामीण परिवार का 56.41 फीसदी है.
निवेश कम है और लगातार कम हो रहा है
कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती कम निवेश और उसमें भी लगातार घटता निवेश है. कृषि सांख्यिकी 2017 के मुताबिक 2011-12 से 2016-17 के दौरान कृषि क्षेत्र में सरकारी निवेश 0.3 से 0.4 फीसदी रहा है वहीं निजी क्षेत्र का निवेश 2.7 फीसदी से घटकर 1.8 फीसदी पर पहुंच गया है. इसके चलते क्षेत्र में कुल निवेश 2011-12 में 3.1 फीसदी से घटकर 2.2 फीसदी पर पहुंच गया.
Source - Aaj Tak

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