14 Feb 2019

विश्व विख्यात है कांगड़ा मंदिर, यहां से चौथी बार सांसद बने शांता कुमार

विश्व विख्यात है कांगड़ा मंदिर, यहां से चौथी बार सांसद बने शांता कुमार

बाणगंगा और मांझी नदी के बीच बसा कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश की राजनीति में अहम दखल रखता है. कांगड़ा अपने कई प्रसिद्ध मंदिरों के लिए प्रसिद्ध तो है, लेकिन इसकी पहचान यहां के सांसद शांता कुमार से भी होती है. बीजेपी सांसद शांता कुमार, जो इस सीट से चार बार संसद पहुंचे. इस बार उन्होंने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया तो बीजेपी अब नए चेहरे की तलाश में जुट गई है. शांता कुमार, हिमाचल प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं.
1966 तक पंजाब में शामिल कांगड़ा को 1972 में पूर्ण रुप से हिमाचल प्रदेश के जिले के रूप में दर्जा मिला. इस इलाके की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर है. यहां चाय के बगान तो हैं ही, साथ में छोटे-मोटे कुटीर उद्योगों के जरिए लोग अपनी आजीविका चलाते हैं. हिमालय की गोद में होने के कारण यहां भी हिमाचल के बाकी हिस्सों की तरह सैलानी घूमने आते हैं. इस लोकसभा क्षेत्र के अन्तर्गत सूबे की 17 विधानसभा सीटें आती है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
कांगड़ा लोकसभा सीट का राजनीतिक इतिहास बाकी सीटों की तरह है. पहले यह सीट कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी, बाद में बीजेपी का कमल खिला. अगर शुरुआत 1951 से की जाए तो कांग्रेस के हेमराज ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी. वह लगातार चार बार (1951, 1957, 1962 और 1967) में सांसद रहे. 1971 में कांग्रेस के ही विक्रम चंद इस सीट से जीते. 1977 में यह सीट बीएलडी के खाते में चली गई और उसके प्रत्याशी दुर्गा चंद जीतने में कामयाब हुए. 1980 में कांग्रेस ने वापसी की और विक्रम चंद फिर जीते. 1984 में भी कांग्रेस अपने गढ़ को बचाने में कामयाब रही और चंद्रेश कुमारी जीतीं.
1989 में पहली बार इस सीट पर कमल खिला. शांता कुमार पहली बार जीतकर संसद पहुंचे. 1991 में वह मुख्यमंत्री थे, इसलिए इस सीट पर डीडी खनोरिया को बीजेपी ने मैदान में उतारा और वह जीतने में कामयाब हुए. इसके बाद कांग्रेस ने वापसी की और 1996 का चुनाव कांग्रेस के सत महाजन जीते. 1998 और 1999 में बीजेपी के शांता कुमार फिर जीते और अटल बिहारी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी बने. 2004 के चुनाव में कांग्रेस ने फिर वापसी की और शांता कुमार को हराकर चंदर कुमार संसद पहुंचे. लेकिन बीजेपी ने कांगड़ा सीट पर कमल खिला दिया. 2009 के चुनाव में बीजेपी के रंजन सुशांत और 2014 में शांता कुमार ने जीत दर्ज की.
सामाजिक तानाबाना
कांगड़ा लोकसभा सीट के अन्तर्गत राज्य की 17 विधानसभा सीटें (चुराह, चम्बा, डलहौज़ी, भटियात, नूरपुर, इन्‍दौरा, फतेहपुर, ज्‍वाली, ज्वालामुखी, जयसिंहपुर, सुलह, नगरोटा, कांगड़ा, शाहपुर, धर्मशाला, पालमपुर, बैजनाथ) आती है. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 13 सीटों (चुराह, चम्बा, भटियात, नूरपुर, इन्‍दौरा, ज्‍वाली, ज्वालामुखी, जयसिंहपुर, सुलह, नगरोटा, शाहपुर, धर्मशाला, बैजनाथ) और कांग्रेस ने 4 सीटों (डलहौज़ी, फतेहपुर, कांगड़ा, पालमपुर) पर जीत दर्ज की थी. इस सीट पर वोटरों की संख्या 12.58 लाख है. इनमें 6.45 लाख पुरुष वोटर और 6.12 महिला वोटर है. 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां करीब 64 फीसदी मतदान हुआ था.
2014 का जनादेश
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांगड़ा लोकसभा सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. बीजेपी के कद्दावर नेता शांता कुमार ने कांग्रेस के चंदर कुमार को करीब 1.70 लाख वोटों से मात दी थी. शांता कुमार को 4.56 लाख और चंदर कुमार को 2.86 लाख वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी के डॉ. रंजन सुशांत (24 हजार वोट) रहे. नोटा को 8704 वोट मिले थे. खास बात है कि ठीक इस चुनाव से पहले यानी 2009 में बीजेपी के टिकट पर लड़े डॉ. रंजन सुशांत 3.22 लाख वोटर पाकर सांसद बने थे, लेकिन वह 2014 में बागी हो गए और आम आदमी पार्टी से लड़े, लेकिन अपनी जमानत नहीं बचा पाए.
शांता कुमार का राजनीतिक सफर
बीजेपी के बड़े नेताओं में शुमार शांता कुमार इस सीट से चौथी बार सांसद है. शांता कुमार ने अपने सियासी सफर की शुरुआत 1963 में की और वह गढ़जमुला ग्राम पंचायत के पंच के रूप में चुना गया. बाद में उन्हें भवारना में पंचायत समिति के सदस्य के रूप में चुना गया और फिर 1965 से 1970 तक कांगड़ा में जिला परिषद के अध्यक्ष रहे. वह 1972 में हिमाचल प्रदेश विधान सभा के लिए चुने गए. वह 1985 तक सदस्य बने रहे. वह 1990 में फिर से सदन के लिए चुने गए और 1992 तक रहे.
वे 1977 में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद दोबारा 1990 में फिर से मुख्यमंत्री बने. वह 1980 से 1985 तक हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे. शांता कुमार 1989 में कांगड़ा से 9वीं लोकसभा के लिए चुने गए थे. इसके बाद वह 1998 और 1999 में दो बार फिर संसद पहुंचे. वह 1999 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री भी रहे. वह 2008 में हिमाचल प्रदेश से राज्य सभा के लिए चुने गए. 2014 में वह कांगड़ा से 16वीं लोकसभा के लिए चुने गए.
सांसद का रिपोर्ट कार्ड
साल 1934 में जन्मे शांता कुमार ने अपने सियासी सफर की शुरुआत टीचर की नौकरी छोड़कर की थी. वह बीजेपी के बड़े नेताओं में से एक हैं, हालांकि, अब उन्होंने अपने सियासी सफर से संन्यास लेने का ऐलान किया है. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, शांता कुमार के पास 1.98 करोड़ की संपत्ति है. इसमें 1.01 करोड़ चल संपत्ति और 97 लाख की अचल संपत्ति है. उनके ऊपर कोई देनदारी नहीं है.
जनवरी, 2019 तक mplads.gov.in पर मौजूद आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी सांसद शांता कुमार ने अभी तक अपने सांसद निधि से क्षेत्र के विकास के लिए 22.17 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. उन्हें सांसद निधि से अभी तक 24.66 करोड़ मिले हैं. इनमें से 2.50 करोड़ रुपए अभी खर्च नहीं किए गए हैं. उन्होंने 96.53 फीसदी अपने निधि को खर्च किया है.
Source - Aaj Tak

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