पेड़ पर गिरा था इंदिरा के बेटे संजय गांधी का विमान, ऐसे निकालना पड़ा शव


23 जून 1980 को एक ऐसा हादसा हुआ जिससे पूरा देश सन्‍न रहा गया. आज ही रोज भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी का विमान दुर्घटना में निधन हो गया था. ये ऐसा विमान हादसा जिसने हर शख्स को दहला कर रख दिया. संजय गांधी को इंदिरा गांधी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता था. वह तेजतर्रार शैली और दृढ़ निश्चयी सोच और सादगी की वजह से वो देश की युवा पसंद थे. जानते हैं कैसे हुआ विमान हादसा.... 

कैसे हुआ था विमान हादसा 
गर्मी की सुबह संजय गाधी रोज ही तरह ही सफदरजंग एयरपोर्ट के लिए अपनी कार से निकले. जहां दिल्ली फ्लाइंग क्लब के नए विमान 'पिट्स एस 2ए' को वह उड़ाने के लिए बेहद उत्सुक थे.

आपको बता दें, ऐसा पहली बार नहीं था जब 23 जून को संजय गांधी पहली बार इस विमान में उड़ान भरने आए थे. विमान में वह 23 जून को उन्होंने चौथी बार विमान में भरी थी. इससे 1 दिन पहले उन्होंने इसी विमान में अपनी पत्नी और सफदरजंग एयरपोर्ट के अधिकारी के साथ आसमान की सैर की थी.

हालांकि संजय गांधी के साथ उड़ान भर चुके पायल, विमान उड़ान को लेकर उनकी काबिलियत और उनकी जानकारी का लोहा मानते थे.

23 जून की सुबह 7 बजकर 58 मिनट पर सफेद और लाल धारियों वाला 'पिट्स एस 2ए' विमान उड़ान के लिए तैयार था. टू सीटर विमान में फ्लाइंग क्लब के चीफ इन्स्ट्रक्टर सुभाष सक्सेना को साथ लेकर संजय आसमान की ऊंचाई को छूने निकल पड़े.

इससे पहले विमान आसमान की ऊंचाई छूता, उससे पहले ही संजय ने विमान को गोल- गोल घूमाना शुरू कर दिया. विमान तेजी से धरती की ओर आता फिर ऊपर की ओर चला जाता. संजय विमान को खतरनाक निचाई पर लाकर गोते खिलाने लगे थे. उनके ऊपर उस दिन रोमांच की चाह कुछ ज्यादा ही थी. जिस वजह से उन्हें कुछ पल के रोमांच की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी.

11 मिनट में संजय का विमान हवा में कलाबाजी करता रहा. ऐसा माना जाता है संजय ने विमान की क्षमता को परखने का फैसला कर लिया था. 12वें मिनट में विमान कुछ ज्यादा ही तेजी से धरती की ओर आया. उस वक्त विमान उनके सरकारी आवास के कुछ 100 फीट ही ऊपर था.

संजय वापस आसमान की तरफ उड़ना चाहते थे तभी विमान का इंजन बंद हो गया. और पलक झपकते ही सबकुछ खत्म हो गया. जब विमान को गिरते हुए कंट्रोल टॉवर में बैठे लोगों ने देखा तो उनके मुंह खुले के खुले रह गए. उन्होंने देखा कि पिट्स अशोका होटल के पीछे एकदम से गायब हो गया है. सक्सेना के सहायक ने भी तेजी से विमान को नीचे गिरते हुए देखा था.

संजय का विमान अशोका होटल के पीछे एक पेड़ पर जा गिरा था. विमान के टूकड़े-टुकड़े हो गए थे. वहीं संजय गांधी और इन्स्ट्रक्टर सुभाष सक्सेना की मौके पर ही मौत हो गई थी. बताया जाता है पेड़ काटकर दोनों के शव उतारे गए थे. 

विमान क्रैश हादसे में इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी की मौत की खबर आग की तरह फैल गई थी. घटनास्थल पर एंबुलेंस और एयरक्राफ्ट के सरकारी अधिकारी और फायर ब्रिगेड पहुंचे. जिसके बाद पेड़ की डालियां काटी गई और विमान के मलबे के बीच से संजय और सुभाष की शव निकाले गए. जिसके बाद दोनों की शवों को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. कहा जाता है 8 डॉक्टर्स की टीम को उनके शरीर को एक साथ जोड़ने में 4 घंटे से ज्यादा का समय लगा था.

जब मां इंदिरा गांधी को पता चला, छोटा बेटा नहीं रहा 
जैसे ही हादसे की खबर मां इंदिरा गांधी को मालूम चली वह तुरंत सफदरजंग अस्पताल की ओर रवाना हुई. जिस बेटे ने सियासत में मां का हाथ थामे रखा उसके बारे में ऐसी खबर सुन इंदिरा के पैरों तले जमीन खिसक गई थी. जैसे ही बेटे की लाश देखी तो उसके निर्जीव शरीर के देखकर अपना दर्द नहीं रोक पाई और फूट- फूटकर रोने लगीं. वहीं आधिकारिक तौर पर सुबह 10 बजे संजय गांधी की मौत की खबर दे दी गई थी. जिसके बाद उनके चाहने वालों का भीड़ अस्पताल के बाहर इकट्ठी हुई. शाम 6:30 बजे उनकी शव यात्रा निकाली गई थी.

संजय के फैसले के आगे झूकती थी मां इंदिरा 

एक समय ऐसा था जब संजय गांधी अपनी मां इंदिरा गांधी के सामानांतर अपनी सरकार चलाया करते थे. बता दें, उनके फैसलों के आगे इंदिरा गांधी को भी झुकना पड़ता था. संजय गांधी ने कांग्रेस के कुछ नेताओं और अधिकारियों की दम पर देश की आर्थिक नीतियों और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के फैसलों को प्रभावित करना शुरू कर दिया था. जिसका एक बहुत बड़ा उदाहरण परिवार नियोजन की पुरुष नसबंदी योजना और देश के आम आदमी की कार कहलाने वाली मारुति 800 को देश में लाने का श्रेय संजय गांधी को ही जाता है.

Source - Aaj Tak